गुणों का खजाना है मामूली सी दिखने वाली चांगेरी घास, हृदय रोगों से लेकर ल्यूकोरिया तक में असरदार
आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर ऐसे कई अमूल्य खजाने हैं, जिनका उपयोग सदियों से विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है.
इसमें अनेक जड़ी-बूटियां होती है, जो देखने में तो समान्य होती है, लेकिन वो अपने गुणों के कारण आयुर्वेद में विशेष स्थान रखती है.
इन्ही में से एक है चांगेरी घास, जो कहीं पर भी आसानी से मिल जाती है, लेकिन ज्यादातर लोग इसके गुणों से अंजान होते है.
आयुर्वेद के अनुसार, चांगेरी घास हृदय संबंधी रोगों से लेकर त्वचा की समस्याओं तक में लाभकारी मानी जाती है.
ये घास दिखने में तीन पत्तों वाली होती है, जिसका आकार भी दिल शेप का होता है और इसपर पीले रंग के छोटे-छोटे फूल भी आते हैं.
चांगेरी घास के इस्तेमाल से पेट दर्द, गैस, अपच और बवासीर, आंतों में होने वाले खराब बैक्टीरिया को भी कंट्रोल करने के साथ ही हृदय को स्वस्थ रखता हैं.
यदि चेहरे पर बार-बार मुहांसे आते हैं तो चांगेरी घास का पेस्ट लाभकारी होता है, ये संक्रमण को रोकते हैं.
ज्यादातर महिलाओं में ल्यूकोरिया की समस्या देखी जाती है और इससे धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं.
ल्यूकोरिया में चांगेरी के पत्तों के रस का सेवन लाभकारी रहेगा. ये हड्डियों को मजबूत करने का काम करती हैं और कमर दर्द में भी राहत मिलती है
चांगेरी में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होने की वजह से चांगेरी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करती है.
इसके अलावा, चांगेरी सूजन, जोड़ों के दर्द, वजन को नियंत्रण करने और मसूड़ों के लिए लाभकारी होती है.