पापी की मदद करने वाला पुण्यात्मा होता है, क्यों ऐसा बोले प्रेमानंद महाराज

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज जी अपने विचारों के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. वो लोगों को जीवन जीने का सही मार्ग दिखाते हैं.

भक्त प्रेमानंद महाराज जी की शरण में जाकर अपने कुछ प्रश्न पूछते हैं. 

इसी कड़ी में एक भक्त ने पूछा कि जब भी हम बुरी हालत में किसी व्यक्ति को देखते हैं तो हमारे मन में यही आता है कि, जरूर यह अपने बुरे कर्मों या पापों की सजा भोग रहा होगा. 

इसलिए भी कई बार हम पापी व्यक्तियों की मदद करने से पीछे हट जाते हैं.

भक्त के इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि, ‘पापी की मदद करने वाला पापी नहीं, बल्कि पुण्यात्मा होता है’.

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि- बिना भगवान के विधान के हमारी दृष्टि किसी पर नहीं पड़ती, अगर आपकी पड़ी है तो इसका अर्थ यह है कि भगवान ने आपको सेवा का अवसर दिया है.

महाराज कहते हैं कि, जितना संभव हो सके हमें मदद करना चाहिए. आपकी सहायता से पापी व्यक्ति के पाप नष्ट होंगे और जीवन में सुख आएगा. इन कामों से आपके पुण्य में वृद्धि होगी.

महाराज ने कहा कि, जैसे अंधेरे में दिया जलाने से अंधेरा नहीं फैलता, ठीक उसी तरह पापी व्यक्ति की मदद से पाप नहीं लगता. सेवा तो प्रकाश की तरह है.

यदि सेवा करने से किसी का पाप लगता, तो अस्पताल, धर्मशालाएं और दान की परंपरा गलत होती. करुणा और सेवा कभी पाप नहीं होते हैं. बल्कि सेवा भाव से जीवन आसान होता है.