ऐसे लोगों के प्राण यमराज के दूत नहीं, बल्कि स्वयं विष्णुदूत लेने आते हैं
गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद के कर्मों के बारे में विस्तार से बताया गया है. माना जाता है कि किसी व्यक्ति का जब अंतिम समय आता है, तो यमदूत उसे लेने आते हैं.
गरुड़ पुराण में यमदूतों के भयानक रूप का भी उल्लेख किया गया है. वे पापियों को बेरहमी से घसीटते हुए ले जाते हैं.
वहीं, गरुड़ पुराण में ऐसे 3 तरह के लोगों का जिक्र है, जिसे यमदूत कभी हाथ नहीं लगाते. ऐसे लोगों का प्राण लेने के लिए स्वयं भगवान के दिव्य पार्षद आते हैं. आइए जानते हैं उन लोगों के बारे में…
जो लोग अपना पूरा जीवन ईश्वर की भक्ति और सिमरन में बिता देते हैं. उसका अंत समय बहुत शांति से कटता है. ऐसे लोगों के के प्राण हरने के लिए सीधे वैकुंठ धाम से विष्णुदूत आते हैं.
जो लोग हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं. जैसे भूखों को खाना खिलाना, बीमारों की सेवा करना और बेसहारा लोगों को आश्रय देना सबसे बड़ा धर्म है. ऐसे दयालु लोगों के पास जाने से यमदूत खुद कतराते हैं.
जिन लोगों के जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएं. लेकिन वो कभी झूठ और बेईमानी का रास्ता नहीं चुनते. ऐसे लोगों को स्वयं भगवान लेने आते हैं.
जो लोग माता पिता की सेवा करते हैं, किसी का दिल नहीं दुखाते और धर्म के नियमों का पालन करते हैं, उन्हें यमराज का भय नहीं सताता. यमदूत ऐसे लोगों को दूर से ही प्रणाम करते हैं.
प्राण निकलते समय ऐसे लोगों को बिल्कुल भी दर्द नहीं होता. इनकी आत्मा को सीधे मोक्ष या उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है.