इसी भावना के तहत राम नाम का जाप हो, कृष्ण का स्मरण, हनुमान जी की भक्ति या देवी की उपासना. बाबा इन सभी को आध्यात्मिक साधना का हिस्सा मानते थे. वे भक्तों को अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान के किसी भी रूप का नाम जपने और पूरे मन से ईश्वर का स्मरण करने की प्रेरणा देते थे.