अहोई अष्टमी पर दुर्लभ योग में करें ये उपाय, संतान के जीवन में आएगी खुशहाली

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का पर्व संतान के सुखद भविष्य और परिवार की खुशहाली से जुड़ा माना जाता है. हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है.

इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में तरक्की की कामना के साथ अहोई माता की आराधना करती हैं.

इस अवसर पर महिलाएं पूरे दिन निर्जला या अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखती हैं. शाम के समय शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है. इसके बाद रात में तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत का पारण किया जाता है.

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक यह व्रत करने से संतान पर अहोई माता की कृपा बनी रहती है. आइए जानते हैं इस साल अहोई अष्टमी कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ समय क्या है और कौन से उपाय करना शुभ माना जाता है.

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा. उदया तिथि और व्रत परंपरा के अनुसार अहोई अष्टमी का उपवास 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा.

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ ख़ास उपाय करने से संतान को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में…

अहोई अष्टमी पर संतान की पढ़ाई और तरक्की की कामना करने वाली माताएं अहोई माता को दूध और चीनी अर्पित कर सकती हैं. धार्मिक मान्यताओं में इस भोग को शुभ माना जाता है.

पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद अपनी संतान को दें. मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और उनका पढ़ाई में मन लगता है.

संतान को बुरी नजर और नकारात्मक प्रभावों से बचाने की कामना के लिए अहोई अष्टमी पर पूरी और हलवा बनाकर माता को अर्पित करना शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक भोग लगाएं और बाद में इसे परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद के रूप में बांट दें.

अहोई अष्टमी का सबसे महत्वपूर्ण विधान संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ उपवास रखना है. इस दिन सुबह से व्रत का संकल्प लें और शाम को अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करें. पूजा के दौरान व्रत कथा सुनें और संतान के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करें.