क्या आप भी लगाती हैं अलग-अलग उंगलियों से मांग में सिंदूर? जान लें महत्व
सनातन धर्म में सिंदूर महिलाओं के सुहाग का प्रतीक माना जाता है. वैवाहिक जीवन में आने के बाद महिलाएं रोज अपने मांग में सिंदूर लगाती हैं.
कई बार महिलाएं अपनी अलग-अलग उंगलियों से सिंदूर लगाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अलग-अलग उंगलियों से सिंदूर लगाने का क्या महत्व है. आइए जानते हैं...
शास्त्र के अनुसार, अंगूठे पर सबसे अधिक प्रभाव शुक्र ग्रह का होता है. आमतौर पर महिलाएं इस उंगली से सिंदूर नहीं लगाती. लेकिन कुछ तांत्रिक और धार्मिक कार्यों में इस उंगली से सिंदूर लगाया जाता है.
तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) उंगली से बृहस्पति ग्रह की ऊर्जा जुड़ी होती है. इस उंगली से सिंदूर लगाने से ज्ञान में वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है.
हालांकि, कुछ धार्मिक कार्यों में सिंदूर लगाने के लिए तर्जनी उंगली का इस्तेमाल कम ही किया जाता है. क्योंकि इस उंगली से अहंकार और अधिकार को भी दर्शाया जाता है.
मध्यमा (बीच वाली उंगली) शनि की ऊर्जा से जुड़ी होती है. ज्योतिष में शनि को कर्म और अनुशासन का कारक माना गया है. हालांकि, धार्मिक अनुष्ठानों में इस उंगली से सिंदूर नहीं लगाया जाता. इससे निर्णय क्षमता प्रभावित होती है.
अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) से सिंदूर लगाना सबसे शुभ माना गया है. इस उंगली से सूर्य ग्रह की ऊर्जा जुड़ी होती है. इसलिए इससे सिंदूर लगाने पर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बना रहता है.
कनिष्टिका (सबसे छोटी उंगली) बुध ग्रह की ऊर्जा से जुड़ी होती है. सबसे छोटी उंगली से सिंदूर लगाने पर भावनाएं नियंत्रण में रहती हैं. आमतौर पर सिंदूर लगाने के लिए इस उंगली का इस्तेमाल कम ही किया जाता है.
शास्त्र के अनुसार, महिलाएं यदि अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) से मांग भरती हैं, तो उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है. मान्यता है कि ऐसा करने से पति की उम्र बढ़ती है.