दुल्हन को भूलकर भी नहीं देखनी चाहिए अपनी बारात, वजह जान हो जाएंगे हैरान

सनातन धर्म में विवाह एक पवित्र संस्कार माना गया है. विवाह का प्रत्येक अनुष्ठान परंपरा के अनुसार किया जाता है.

इन्हीं परंपराओं में से एक ये भी है कि दुल्हन को विवाह से पहले अपनी बारात नहीं देखनी चाहिए. ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह…

दूल्हे की बारात को मंगल ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसलिए दुल्हन को मंडप में शुभ समय पर ही लाया जाता है, ताकि वर-वधू पहली बार एक दूसरे को दुल्‍हा-दुल्‍हन के रूप में देखें.

तो वह धार्मिक विधि के अनुसार हो. यही कारण है कि कई परिवारों में दुल्हन को पहले से बारात देखने से रोका जाता है.

शिव पुराण में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का वर्णन मिलता है. कथा के अनुसार विवाह की सभी रस्में विधि-विधान और शुभ मुहूर्त के अनुसार संपन्न हुईं थी.

इस वजह से भी हिंदू धर्म में विवाह में धार्मिक नियमों और शुभ समय को विशेष महत्व दिया जाता है. हालांकि इस कथा में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि माता पार्वती ने बारात नहीं देखी थी.

बल्कि इसके विपरीत यह बात लिखी है कि माता पार्वती जब बारात देखी तो वह बारातियों को देखकर बेहोश हो गई थीं.

यह भी एक कारण हो सकता है कि, दुल्‍हन को बारात देखने से रोका जाता है क्‍योंकि मान्‍यता है कि दुल्‍हन को बारातियों की नजर लग जाती है.

आज के दौर में कई विवाह से पहले भी दुल्हन बालकनी, खिड़की या मंच से बारात देख लेती है.

हालांकि, कोशिश यही रहती हैं दुल्‍हन को कोई तब तक न देख पाए जब तक वह जयमाला के लिए न जाए. परंपरा के अनुसार इस रीति का पालन होता है.