सिर्फ हिंदू ही नहीं, मुस्लिम और सिख भी मनाते हैं बसंत पंचमी का पर्व! जानें रोचक तथ्य
वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा भी कहा जाता है, जो ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत के देवी हैं.
क्या आप जानते हैं कि, यह त्योहार सिर्फ हिंदुओं का ही पर्व नहीं, बल्कि मुस्लिम और सिख परंपराओं में भी इसकी झलक देखने को मिलती है.
कई इतिहासकार मानते हैं कि, अमीर खुसरो ने बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनकर गीत लिखे-'आओ बसंत बहार, पीत पहिरो हो यार'
निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में आज भी बसंत पंचमी के मौके पर पीले फूल चढ़ाने की परंपरा है.
वहीं मुगल बादशाहों विशेष तौर पर जहांगीर और शाहजहां के समय में बसंत को स्प्रींग फेस्टिवल की तरह मनाया जाता था.
इसके अलावा, सिख इतिहास में बसंत पंचमी की परंपरा सदियों पुरानी है. यह पंजाब में पीले सरसों के खेत का प्रतिनिधित्व करता है.
बसंत पंचमी के दिन ही अमृतसर के हरमंदिर साहिब में संगीतकार बसंत राग कीर्तन का आयोजन और मेले लगता हैं.
वसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही दुनियाभर में ईसाई ईस्टर मनाते हैं, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान को समर्पित एक पर्व है.
इस दौरान अधिकतर ईसाई अपनी प्रिय चीजों का त्याग किया जाता है. कुछ लोग मांसाहार छोड़ते हैं, जबकि कुछ लोग धूम्रपान और शराब पीना छोड़ा देते हैं.
ईसाइयों के लिए इस दिन की शुरुआत चर्च में प्रार्थना के साथ होती है. परिवार और दोस्तों के बीच फूल और ईस्टर अंडे का आदान प्रदान किया जाता है.