दिल्ली में प्रदूषण से अस्थमा का खतरा, सेहत बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

दिल्ली-NCR में अक्टूबर के दौरान एक बार फिर वायु प्रदूषण का असर बढ़ने लगा है. मौसम में बदलाव और हवा में प्रदूषक कणों की बढ़ती मौजूदगी के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. खराब हवा का असर खासकर अस्थमा और एलर्जी से परेशान लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है.

वायु प्रदूषण केवल पहले से बीमार लोगों के लिए ही चिंता का विषय नहीं है. हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक कण सांस के रास्ते शरीर में पहुंचकर वायुमार्ग में जलन और सूजन पैदा कर सकते हैं.

इसके कारण खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अस्थमा से पीड़ित लोगों की सांस की नलियां पहले से अधिक संवेदनशील होती हैं. प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण इन नलियों को प्रभावित कर सकते हैं.

इससे अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं और कुछ लोगों को अचानक सांस लेने में अधिक परेशानी हो सकती है.

बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या एलर्जी से परेशान लोगों को बदलते मौसम में खास ध्यान रखना चाहिए. बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का AQI जरूर जांचें. प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर सुबह और शाम की आउटडोर गतिविधियों को सीमित करना फायदेमंद हो सकता है.

खराब हवा के संपर्क में आने पर कुछ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां महसूस हो सकती हैं. इनमें प्रमुख लक्षण शामिल हैं: लगातार खांसी या गले में खराश. सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना. सीने में जकड़न या भारीपन महसूस होना. सामान्य गतिविधियों के दौरान सांस फूलना. आंखों में जलन और असहजता होना.

हवा की गुणवत्ता खराब होने पर गैर-जरूरी बाहरी गतिविधियों को कम करें. खासकर बच्चों और सांस की बीमारी वाले लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए. प्रदूषण ज्यादा होने पर दौड़ने, साइकिल चलाने या तेज एक्सरसाइज जैसी गतिविधियों को खुले में करने से बचें.

बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष कण-रोधी मास्क प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है. मास्क सांस संबंधी परेशानी का इलाज नहीं है.

धूम्रपान, अगरबत्ती के धुएं, तेज खुशबू वाले उत्पादों और धूल से बचें. घर की नियमित सफाई करें और जहां संभव हो, HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

जब बाहर प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक हो, तो खिड़कियां लंबे समय तक खुली रखने से बचें. हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां खोल सकते हैं.