क्‍या होता है डिमेंशिया, कैसे करें इनकी पहचान और कैसे पाए इससे राहत

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई बीमारियों के कारण होने वाली स्थिति है.

डिमेंशिया में व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की शक्ति, भाषा, निर्णय क्षमता और व्यवहार धीरे-धीरे क्षीण होती हैं.

65 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 5-8% लोग किसी न किसी प्रकार के डिमेंशिया से प्रभावित होते हैं.

डिमेंशिया को एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर के रूप में देखा जाता है. जिसमें समय के साथ मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट होती जाती हैं.

ऐसे में समय रहते इसका निदान और देखभाल रोग की गति को धीमा कर सकती है. रोगी के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकती है.

अल्‍जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण है. इसमें मस्तिष्क में प्रोटीन जमा होने से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं.

वेस्कुलर डिमेंशिया में मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होने से होता है. इससे सोचने की क्षमता और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है.

लूई बॉडी डिमेंशिया में मस्तिष्क की नसों में असामान्य प्रोटीन जमा होते हैं. इसमें भ्रम, नींद की दिक्कतें और संतुलन की समस्याएं होती हैं.

फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया के कारण मस्तिष्क के सामने और किनारे के हिस्से में क्षति होती है. वहीं लंबे समय तक पार्किंसन होने के बाद कई लोगों को डिमेंशिया हो सकता है.

सिर की चोट, मस्तिष्क में संक्रमण, नशा, विटामिन बी 12 की कमी, थायरॉइड या लिवर से जुड़ी समस्याएं, डिप्रेशन भी इसके कारणों में शामिल हैं.