मगरमच्छ के आंसू बहा रहा, आखिर क्यों इस जानवर के आंसुओं को कहा जाता है झूठा
'मगरमच्छ के आंसू बहा रहा', आप सभी ने ये कहावत तो जरूर सुनी होगी. इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब कोई दिखावटी दुख जताता है.
लेकिन क्या आपने ये जानने की कोशिश की है कि आखिर इस मुहावरे के पीछे क्या सच्चाई है.
आइए जानते हैं कि क्या सच में मगरमच्छ रोता है? अगर रोता भी है, तो उसके आंसू को झूठा क्यों कहा जाता है...
बता दें कि मगरमच्छ इंसानों की तरह भावनाओं के कारण नहीं रोते हैं. वो कभी नहीं रोते हैं.
हालांकि, लोग कहते हैं कि मगरमच्छ जब भी अपना शिकार करता है, तो उसकी आंखों से आंसू बहते हैं.
इसी कारण लोगों ने ये मुहावरा बनाया कि मगरमच्छ अपने शिकार पर दया दिखा रहा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है.
दरअसल, मगरमच्छ की आंखों में खास तरह की ग्रंथियां होती हैं. जो आंखों को नम और साफ रखती है.
ये ग्रंथियां समय-समय पर तरल पदार्थ बनाती हैं, ताकि आंखों में धूल या गंदगी न जमे.
जब मगरमच्छ अपने जबड़े को जोर से बंद करता है, शिकार को चबाता है या काफी देर तक मुंह खोलकर बैठा रहता है, तब इन ग्रंथियों पर दबाव पड़ता है.
दबाव बढ़ने पर आंखों से पानी बाहर निकल आता है. जो बिल्कुल आंसुओं जैसा दिखता है. हालांकि, इसका भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं होता.