देवशयनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना घेर लेगी दरिद्रता
वैसे तो हिंदू धर्म में हर माह पड़ने वाली एकादशी तिथि का महत्व है. लेकिन आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली देवशयनी एकादशी का अपना अलग ही महत्व है.
धार्मिक मान्यतानुसार इस दिन से सृष्टि के रचयिता भगवान विष्णु चार माह के लिए निद्रा अवस्था में चले जाते हैं. इस दौरान सृष्टि का कार्यभार भगवान शंकर संभालते हैं.
इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन कुछ कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है.
ऐसे में आइए जानते हैं कि देवशयनी एकादशी के दिन कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए…
तुलसी जी एकादशी तिथि पर व्रत करती हैं. ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल देने की भारी भूल न करें. इससे लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं और जीवन में दरिद्रता बढ़ती है.
देवशयनी एकादशी के दिन नाखून-बाल काटने की भूल न करें. शास्त्रों में इन कार्यों को क्षौर कर्म कहा गया है, जो कि एकादशी के दिन वर्जित हैं.
एकादशी के दिन भूलकर भी बाल और कपड़े न धोएं. इस दिन घर में पोंछा लगाने से भी बचें.
देवशयनी एकादशी के दिन पान खाना वर्जित है. बल्कि 4 महीने के चातुर्मास के लिए ही पान का त्याग कर देना चाहिए. पान रजोगुण की प्रवृत्ति को बढ़ाता है. साथ ही इस दिन टूथपेस्ट करने की बजाय लकड़ी का दातून उपयोग करना चाहिए.
देवशयनी एकादशी के दिन चावल या अन्य तामसिक चीजों का सेवन करने की गलती न करें.
एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए. इसके अलावा इस दिन क्रोध, हिंसा, जुआ, झूठ, चोरी, परनिंदा, छल-कपट, नशे का सेवन जैसा कोई भी अनैतिक काम न करें.