जया एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलती, वरना पाप के बनेंगे भागीदार

सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्‍व है. एकादशी भगवान विष्‍णु को समर्पित है इस दिन प्रभु नारायण की पूजा-अराधना और व्रत करने का विधान है. 

माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है. जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के “उपेंद्र” स्वरूप की पूजा की जाती है.

मान्‍यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाए तो घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और पापों से मुक्ति मिलती है.

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ चीजों को करने की सख्त मनाही होती है. आइए जानते हैं...

एकादशी तिथि पर चावल का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है. एकादशी तिथि पर चावल का दान नहीं करना चाहिए. आप अपनी क्षमतानुसार अन्य चीजों का दान कर सकते हैं.

एकादशी का व्रत रखने वाले जातक लड़ाई-झगड़े से दूर रहे. घर पर बड़े बुजुर्ग या बच्चों पर भी क्रोध न दिखाएं और वाणी पर संयम रखें.

गुस्सा करने, चिल्लाने, तेज आवाज में बोलने या झूठ बोलकर व्रत-पूजा करने से इसका पुण्य नहीं मिलता है.

एकादशी तिथि पर भूलकर भी तुलसी को तोड़ने से बचना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा नहीं मिलती. 

एकादशी पर पूर्ण रूप से सात्विकता का पालन करें. लहसुन-प्याज और मांस-मदिरा से पहरेज करें. इसके साथ ही मसूर की दाल, शहद, बैंगन आदि का सेवन भी न करें.