निर्जला एकादशी से पहले दशमी तिथि पर कर लें ये काम, तभी पूर्ण होगा व्रत
सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी मनाई जाती है. ये दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है.
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. इसके साथ ही उनके नाम से एकादशी का व्रत रखा जाता है.
इस साल 25 जून को निर्जला एकादशी है. मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं.
निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी होती है और इसके लिए नियम व पूजा की तैयारी एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही शुरू हो जाती है.
निर्जला एकादशी व्रत की तैयारियां एक दिन पहले 24 जून, यानी आज से ही प्रारंभ हो जाएंगी. तभी व्यक्ति 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत कर पाएगा. आइए जानते हैं दशमी तिथि को किन नियमों का पालन करना चाहिए…
निर्जला एकादशी व्रत रखना चाहते हैं तो इसके लिए दशमी तिथि को पूरे दिन सात्विक भोजन करें. शाम को सूर्यास्त के समय आखिरी बार सात्विक और हल्का भोजन करें. इसके बाद ब्रश करें. इसके बाद अन्न का त्याग कर दें.
एकादशी व्रत के दिन बाल धोना वर्जित होता है इसलिए एक दिन पहले दशमी तिथि को ही बाल धो लें.
एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को स्पर्श करना, उसमें जल अर्पित करना, तुलसी की पत्तियां तोड़ना वर्जित होता है. भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी दल के अधूरी है. ऐसे में दशमी तिथि को शाम से पहले तुलसी की पत्ती तोड़कर रख लें.
दशमी तिथि की रात को सोने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए निर्जला एकादशी व्रत का संकल्प लें और जल का त्याग कर दें.