बांझपन, कैंसर..., प्लास्टिक के कप में चाय पीने से हो सकती हैं ये बीमारियां

चाय भारत का सबसे पसंदीदा पेय बन चुका है. बच्चों से लेकर बड़ों तक अपनी थकान मिटाने के लिए चाय का सेवन करते हैं. 

ऑफिस हो या कॉलेज हर जगह रोड साइड पर चाय की टपरी मिल जाएगी. लोग सुकून के लिए दोस्तों के साथ प्लास्टिक के कप में गरमा-गरम चाय का लुफ्त उठाते हैं. 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद भर का ये सुकून आपके लिए जानलेवा हो सकता है.

दरअसल, गरम चाय जब कम क्वालिटी वाले प्लास्टिक या पॉलिथीन में डाली जाती है, तो उसमें मौजूद रसायन पेय में घुल सकते हैं.

60 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर फ्थैलेट्स, बिस्फेनॉल ए और स्टाइरीन जैसे हानिकारक तत्व चाय में मिल सकते हैं. 

ये पदार्थ शरीर के हार्मोन तंत्र को प्रभावित करते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ा सकते हैं.

ये केमिकल एंडोक्राइन डिसरप्टर्स की तरह काम करते हैं, यानी एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन और थायरॉइड जैसे हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं.

अगर कोई व्यक्ति दिन में दो से चार बार ऐसी चाय पीता है, तो कम मात्रा में भी लगातार संपर्क शरीर पर जमा असर डाल सकता है.

इसके रिजल्ट के तौर पर हार्मोन असंतुलन, बांझपन की समस्या, वजन बढ़ना, थकान, नींद की गड़बड़ी, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं. 

वहीं, कुछ एक्सपर्ट तो ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और थायरॉइड कैंसर के जोखिम में भी वृद्धि की आशंका जताते हैं.

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गरम चाय हमेशा कांच, स्टील या सिरेमिक के बर्तन में ही लें. कुल्हड़ या मिट्टी के कप भी तुलना सुरक्षित ऑपशन माने जाते हैं.