खाना खाने के बाद क्यों लेते हैं कुम्भकर्ण और भीम का नाम, हैरान कर देगी वजह

सनातन धर्म में भोजन को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं. जो उत्तम स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

आपने ज्यादातर लोगों को देखा होगा कि वो खाना खाने से पहले धरती माता के लिए कुछ अन्न नीचे रखते हैं. 

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी पौराणिक मान्यता के बारे में बताएंगे, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. 

दरअसल, पौराणिक ग्रंथों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि भोजन के बाद कुंभकर्ण और भीम का नाम लेना चाहिए. आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह...

अक्सर बुजुर्ग खाना खाने के बाद पेट पर हाथ फेरते हैं. ग्रंथों के अनुसार, भोजन के बाद पेट पर दक्षिणावर्त हाथ फेरना पाचन तंत्र को सक्रिय करता है.

ऐसा करने के साथ ही एक विशेष श्लोक के जाप का विधान है- "अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च बडवानलम्, भोजनं परिपाकार्थं स्मरेद् भीमं च पञ्चमम्."

इस श्लोक में पांच ऐसी शक्तियों का स्मरण किया गया है, जिनकी पाचन क्षमता अद्भुत मानी जाती है. महर्षि अगस्त्य- जिन्होंने समुद्र का जल पी लिया था.

कुम्भकर्ण- जिनकी आहार क्षमता और पाचन दुनिया में प्रसिद्ध था. शनि देव- जो धीमी लेकिन स्थिर गति के प्रतीक हैं. बड़वानल- समुद्र के भीतर की वह अग्नि जो सब कुछ भस्म कर देती है.

भीम- जिनकी जठराग्नि बेहद तेज थी. मान्यता के अनुसार, इस पांचों का नाम लेकर पेट सहलाने से मानसिक संकेत मिलता है कि अब भोजन को पचाने की प्रक्रिया शुरू करनी है. 

जिससे भोजन आसानी से पच जाता है. यही कारण है कि घर के बड़े-बुजुर्ग भोजन करने के बाद भीम और कुंभकर्ण इत्यादि के नाम को लेने की सलाह देते हैं.