दाह संस्कार के बाद क्यों लगाया जाता है तुलसी का पौधा, जानें रहस्य

इस संसार में दो ही चीजें एकमात्र अटक सत्य है. एक जन्म और दूसरा मृत्यु. सनातन धर्म में मृत्यु को 16 संस्कारों में एक माना जाता है.

हिंदू धर्म में जब भी किसी की मृत्यु होती है, तो उसका दाह संस्कार किया जाता है. वहीं, शवदाह के बाद तुलसी का पौधा लगाने की मान्यता है. 

ऐसे में गरुड़ पुराण के अनुसार आइए जानते हैं कि आखिरी दाह संस्कार के बाद तुलसी का पौधा क्यों लगाया जाता है...

सनातन धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र माना गया है. माना जाता है कि इस पौधे में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास होता है. 

गरुड़ पुराण के 9वें अध्याय में इस बात का जिक्र है कि जहां तुलसी का पौधा लगा होता है, वो जगह तीर्थ के समान पवित्र हो जाती है.

ऐसी जगह पर यमदूत का प्रवेश नहीं हो पाता. यही कारण है कि जब किसी की मृत्यु होती है, तो उसके मुंह में तुलसी का पत्ता रखा जाता है. ऐसा करने से अंतिम समय में प्राण त्यागने में कष्ट नहीं होता. 

गरुड़ पुराण कहता है कि आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए तुलसी बहुत खास है. इस वजह से ही दाह संस्कार के बाद तुलसी का पौधा लगाया जाता है. 

कई स्थानों पर लोग शवदाह के तीन दिन बाद ऐसा करते हैं. वहीं, कई जगहों पर तेहरवीं के दिन इस रस्म को पूरा किया जाता है.

गरुड़ पुराण की मानें, तो शवदाह में तुलसी की लकड़ी का प्रयोग करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है.