बच्चों के साथ रोज खाना खाने की आदत सिखाती है जिंदगी के ये सबक, यहां जानें

अक्सर घरों में देखा जाता है कि छोटे बच्चों को पहले खाना खिलाकर सुला दिया जाता है और इसके बाद परिवार के बाकी सदस्य साथ बैठकर भोजन करते हैं.

माता-पिता के लिए बच्चों को अलग से खिलाना आसान लग सकता है, लेकिन उन्हें परिवार के साथ खाने की आदत डालना उनके विकास के लिए फायदेमंद हो सकता है.

फैमिली मीलटाइम यानी परिवार के साथ बैठकर खाना खाने का समय बच्चों के लिए सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं है. इस दौरान वे दूसरों को देखकर सीखते हैं, खाने की नई चीजों से परिचित होते हैं और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करना भी सीखते हैं.

आइए जानते हैं, बच्चों को साथ बैठाकर खाना खिलाने से उन्हें कौन-सी 3 अहम सीख मिल सकती हैं.

कई बच्चे सब्जियां खाने से मना करते हैं या हर बार अपनी पसंद का खाना ही मांगते हैं. ऐसे में परिवार के साथ बैठकर भोजन करना उनकी इस आदत को सुधारने में मदद कर सकता है.

जब बच्चे अपने माता-पिता और भाई-बहनों को अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ खाते देखते हैं, तो उनकी भी नए स्वाद चखने में दिलचस्पी बढ़ सकती है.

बच्चों को फल, सब्जियां और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ अपनी पसंद से देखने, छूने और चखने का मौका देना भी उपयोगी होता है. इससे वे धीरे-धीरे नए खाने के प्रति सहज हो सकते हैं.

बच्चों के लिए नियमित समय पर भोजन करना एक अच्छी आदत है. जब परिवार रोजाना लगभग एक ही समय पर साथ बैठकर खाना खाता है, तो बच्चों को भी खाने की दिनचर्या समझने में मदद मिलती है.

माता-पिता उनके भूख लगने के संकेतों को बेहतर तरीके से पहचान सकते हैं और उसी के अनुसार भोजन की आदत विकसित कर सकते हैं.

इसके अलावा, टीवी या मोबाइल स्क्रीन देखते हुए खाना खाने के बजाय परिवार के साथ टेबल पर बैठने से बच्चों का ध्यान भोजन पर बना रह सकता है. इससे उन्हें भूख और पेट भरने के संकेतों को समझने का अवसर मिलता है.

परिवार के साथ भोजन करना बच्चों के सामाजिक विकास का भी एक अच्छा हिस्सा हो सकता है. खाने की मेज पर वे दूसरों की बातें सुनना, अपनी बात कहना और अपनी बारी का इंतजार करना सीखते हैं. साथ ही, परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे की मदद करते देखकर उनमें सहयोग की भावना विकसित हो सकती है.

इस दौरान बच्चों को टेबल मैनर्स सिखाने का भी मौका मिलता है. परिवार के साथ भोजन करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बच्चों को अपने माता-पिता के साथ समय बिताने और बातचीत करने का अवसर मिलता है.