पिता के जीवित रहते बेटे भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना हो जाएंगे बर्बाद

सनातन धर्म में माता पिता को भगवान से भी ऊपर माना जाया है. हर किसी के जीवन में माता-पिता का ख़ास महत्व होता है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में सूर्य देव को पिता का प्रतीक माना गया है. ऐसे में अगर दिन लोगों का अपने पिता के साथ संबंध अच्छा होता है, उन्हें जीवन में कामयाबी मिलती है.

शास्त्रों में कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिन्हें करने से समाज में पिता का सम्मान बना रहता है. हालांकि, कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें बेटों को अपने पिता के जीवित रहते नहीं करना चाहिए. से में आइए जानते हैं कि पिता के रहते बेटों को कौन से 5 काम नहीं करने चाहिए…

परंपराओं के अनुसार, जब तक घर में पिता जीवित हैं, तब तक पितरों से जुड़े कोई भी बड़े धार्मिक काम करने का पहला हक सिर्फ और सिर्फ उनका ही होता है. अगर पिता के रहते हुए ये काम बेटा करता है, तो ये बेहद अशुभ माना जाता है.

पूरे परिवार की भलाई के लिए होने वाले बड़े हवन या यज्ञ की गद्दी पर बैठने का पहला अधिकार पिता का होता है. कई बार बेटे उत्साह में आकर खुद मुख्य यजमान की जगह बैठ जाते हैं, जो पिता के अनादर के समान माना जाता है.

मान्यताओं के अनुसार, जब तक पिता जीवित रहते हैं, तब तक बेटों को अपनी मूंछ पूरी तरह साफ यानी क्लीन शेव नहीं करवानी चाहिए.

किसी भी सामाजिक काम, दान पुण्य की रसीद या मंच पर हमेशा अपने नाम से पहले पिता का नाम ही आगे रखना चाहिए. आज भी हमारे समाज में शादी के कार्ड पर पिता के नाम के बाद ही पुत्र लिखने का चलन है, जो इंसान के भीतर के घमंड को खत्म करता है.

कभी भी समाज में अपने पिता की बात को काटना नहीं चाहिए. अगर किसी बात पर मतभेद हो भी, तो उसे घर के अंदर कमरे में बैठकर शांति से सुलझाना ही एक अच्छे और संस्कारी बेटे की पहचान होती है.