भाद्रपद अमावस्या के दिन इन जगहों पर जलाएं दीपक, पितृ दोष से मिलेगा छुटकारा

मान्यताओं के अनुसार हमारे सनातन धर्म में अमावस्या की तिथि को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है. विशेष तौर पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ज्यादा अहम माना गया है.

माना जाता है कि इस दिन जातकों को अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है. इसके साथ ही पितरों की आत्मा को शांति मिलती है.

शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या के दिन कुछ विशेष जगहों पर दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. इससे पितृ दोष से छुटकारा मिलता है. आइए जानते हैं…

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा यमराज और पूर्वजों की मानी जाती है. ऐसे में अमावस्या की शाम इस दिशा में सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक जलाएं.

माना जाता है कि इस उपाय को करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.

अगर आप पितृ दोष की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इस उपाय को करने से यह दोष कटता है और रुके हुए कार्य बनने लगते हैं.

अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के पास या दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख, शांति, अच्छे स्वास्थ्य और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

अगर आप घर में नकारात्मक शक्तियों का सामना कर रहे, तो घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं. इस उपाय को करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. साख ही अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.

अमावस्या की रात घर के मुख्य द्वार और ईशान कोण पर गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाने से घर में मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है.