गुरु रविदास जी की जयंती आज, पढ़ें उनके कुछ अनमोल विचार

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु रविदास जी का जन्म हुआ था. गुरु रविदास भक्तिकालीन संत और महान समाज सुधारक थे.

हर साल माघ माह की पूर्णिमा तिथि पर उनकी जयंती मनाई जाती है. आज 01 फरवरी को माघ माह की पूर्णिमा तिथि है. 

संत रविदास के विचार से खुशहाल जीवन जीने का मार्गदर्शन प्राप्त होता है. ऐसे में उनकी जयंती पर आइए जानते हैं उनके कुछ अनमोल विचार…

रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय। प्रेम न मुख खोलै कभऊँ, नैन देत हैं रोय।। संत रविदास ने इस दोहे में बताया है कि प्रेम को कितना भी छिपाएं वह छिपता नहीं है, अंत में वह दिख ही जाता है. प्रेम को कह कर नहीं जताया जा सकता है. प्रेम को आंखों से निकले हुए आंसू ही बयां करते हैं.

मन चंगा तो कठौती में गंगा।। संत रविदास इस दोहे में कहते हैं कि जिस व्यक्ति का मन पवित्र है, उसकी प्रार्थना करने पर मां गंगा स्वयं उसके हाथ में रखे बर्तन में आ जाती हैं.

मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेऊं सहज स्वरूप।। वह अपने इस दोहे के माध्यम से यह बताते हैं कि, किसी की पूजा उसके ऊंचे पद को देख कर नहीं करना चाहिए. बल्कि उस व्यक्ति को पूजना चाहिए जो ऊंचे पद पर भले ही आसीन न हो, परंतु उसके अंदर गुण हों. समाज में गुणवान व्यक्ति ही सदैव पूज्यनीय होता है.

ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन। पूजिए चरण चंडाल के जो होवे गुण प्रवीन संत रविदास कहते हैं कि उस ब्राम्हण की पूजा मत कीजिए जो गुणहीन और चरित्रहीन हो, बल्कि उस चंडाल की पूजा करिये जो योग्य और गुणी हो.

भगवान उस हृदय में निवास करते हैं जिसके मन में किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है.