सावन खत्म होते ही मंदिर से बाहर कर दें ये 4 चीजें, वरना घेर लेगी दरिद्रता
28 अगस्त को भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना समाप्त हो गया है. जिसके बाद भाद्रपद महीने की शुरुआत हो गई है.
इस महीने में भगावन श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु, भगवान गणेश, भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए.
वास्तु नियमों के अनुसार, जब भी पूजा का काल बदलता है, तो पूजा घर की ऊर्जा को भी नए सिरे से संतुलित करना जरूरी होता है.
शास्त्रों के अनुसार, सावन बीतने के बाद पूजा घर में रखी कुछ चीजें वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं. इन चीजों को तुरंत हटा देना चाहिए. आइए जानते हैं…
सावन में शिवलिंग पर रोज बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाए जाते हैं. अगर मंदिर में ये सूखे या मुरझाए हुए पड़े हैं, तो इन्हें हटा दें.
सूखे पत्ते घर में नकारात्मकता लाते हैं. इन्हें कचरे में फेंकने के बजाय किसी गमले की मिट्टी में दबा दें या बहते पानी में प्रवाहित करें.
शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए इस्तेमाल होने वाले लोटे, शंख या पंचामृत के बर्तनों में पुराना जल न रहने दें. तांबे और पीतल के पात्रों को अच्छी तरह धो दें.
सावन में की गई आरती की जली हुई बत्तियां, धूप की राख और कपूर के अवशेष मंदिर के कोने में जमा न होने दें. यह दरिद्रता का कारण बन सकते हैं.
भगवान की चौकी पर बिछा पुराना कपड़ा और सावन के दौरान उतारे गए पुराने रक्षासूत्र मंदिर से हटाकर विसर्जित कर दें.