नींद में बड़बड़ाना मामूली आदत नहीं! सेहत से जुड़ा हो सकता है बड़ा संकेत

सोने के दौरान भी हमारा दिमाग पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता. यही वजह है कि नींद में सपने आना एक सामान्य प्रक्रिया है. हालांकि, कुछ लोग सपने देखने के दौरान बोलने, बड़बड़ाने या अनजाने में आवाजें निकालने लगते हैं.

अक्सर लोग इसे नींद से जुड़ी एक सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या हर बार नींद में बोलना सामान्य होता है, या कभी-कभी यह किसी स्वास्थ्य समस्या की ओर भी इशारा कर सकता है? आइए जानते हैं नींद में बड़बड़ाने की संभावित वजहें, इससे जुड़े कारण और किन परिस्थितियों में इसे गंभीरता से लेना चाहिए.

नींद के दौरान बोलने या बड़बड़ाने की स्थिति को सोमनीलोक्वी कहा जाता है. इसे पैरासोमनिया यानी नींद के दौरान होने वाली असामान्य गतिविधियों की श्रेणी में शामिल किया जाता है.

ज्यादातर मामलों में यह गंभीर समस्या नहीं होती और किसी खास इलाज की जरूरत भी नहीं पड़ती. कुछ लोग नींद में सपने के दौरान हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अनजाने में बोलने लगते हैं.

कुछ मामलों में इसके साथ हाथ-पैर हिलाना, पैर चलाना या दूसरी शारीरिक गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं. यह व्यवहार व्यक्ति को जागने के बाद अक्सर याद भी नहीं रहता.

नींद में बोलने या बड़बड़ाने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं. कई बार यह सपनों, भावनात्मक अनुभवों और नींद के दौरान दिमाग में चल रही गतिविधियों से जुड़ा होता है. तनाव और चिंता भी इसके आम कारणों में शामिल हैं.

दिनभर की परेशानियां और तनाव खत्म होने के बाद भी दिमाग उन्हें प्रोसेस करता रहता है. सोते समय मस्तिष्क दिनभर हुई घटनाओं, अनुभवों और यादों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में लगा रहता है.

इसी दौरान कुछ लोगों में अनजाने में बोलने या बड़बड़ाने जैसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. वहीं, डरावने सपने या बुरे सपने भी नींद में बोलने की वजह बन सकते हैं.

ऐसे सपनों के दौरान डर, बेचैनी या अचानक बढ़ा तनाव व्यक्ति के व्यवहार में बोलने या आवाज निकालने के रूप में दिखाई दे सकता है. कभी-कभार नींद में बोलना या बड़बड़ाना आम बात हो सकती है और ज्यादातर मामलों में इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होती.

हालांकि, अगर यह समस्या लगातार होती है या बार-बार बुरे सपने आते हैं, तो इसके पीछे नींद से जुड़ी कोई समस्या या अन्य कारण हो सकता है.

कुछ आसान आदतों में बदलाव करके नींद की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है. सबसे पहले रोजाना समय पर सोने और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें, क्योंकि नींद पूरी न होना भी नींद में बड़बड़ाने की वजह बन सकता है.

सोने से कुछ घंटे पहले शराब, चाय और कॉफी से दूरी बनाना बेहतर है, क्योंकि इनमें मौजूद तत्व नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं. साथ ही, बेडरूम का वातावरण शांत और आरामदायक रखें. रात में सोने से पहले किताब पढ़ना या हल्का संगीत सुनना दिमाग को शांत करने और शरीर को आराम की स्थिति में लाने में मदद कर सकता है.