रात 11 बजे तक जगने वाली महिलाएं नहीं बन पाएंगी मां, हैरान कर देगी वजह

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अपना ख्याल रखना भूल जाती हैं. घर, नौकरी और परिवार को संभालने में ही उनका वक्त बीत जाता है.

वो इन सब चीजों में इतना उलझ जाती हैं कि ख़ुद की सेहत से भी समझौता करने लगती हैं. सुबह जल्दी उठना और रात में देर से सोना ही उनकी दिनचर्या बन जाती है.

लेकिन क्या आप जानती हैं कि कम नींद लेना न सिर्फ आपकी सेहत पर असर डालता है, बल्कि आपकी मां बनने की क्षमता को भी नुक़सान पहुंचाता है. आइए जानते हैं कैसे…

एक्सपर्ट्स के अनुसार, महिलाओं के हार्मोंस और उनकी नींद का आपस में बहुत गहरा नाता है. दिमाग का जो हिस्सा नींद और जागने के हार्मोन्स को कंट्रोल करता है.

वही हिस्सा महिलाओं में ओवुलेशन बनाने की प्रक्रिया को भी चलाता है. ओवुलेशन को शुरू करने वाला हार्मोन LH यानी Luteinizing Hormone गहरी नींद के दौरान बनता है.

ऐसे में अगर नींद में बार-बार रुकावट आए तो LH का बनना कम हो जाता है जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ओवुलेशन छूट सकता है.

जब महिलाएं कम नींद लेती हैं या गलत समय पर सोती हैं, तो इसका सीधा असर उनके उन हार्मोन्स पर पड़ता है जो मां बनने की क्षमता को संभालते हैं.

यानी एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मेलाटोनिन, कोर्टिसोल, LH और FSH का संतुलन बिगड़ जाता है. इनमें से मेलाटोनिन हार्मोन महिलाओं के अंडों की क्वालिटी को अच्छा रखता है और उन्हें सुरक्षित रखता है, लेकिन नींद की कमी के कारण यह ठीक से नहीं बन पाता है.

कम सोने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन बढ़ते हैं और अंडों को सुरक्षित रखने वाले हार्मोन कम हो जाते हैं, जिससे महिलाओं को आगे चल कर कंसीव करने या प्रेगनेंसी में परेशानी आ सकती है.

डॉक्टर्स के अनुसार, 7 से 8 घंटे की नींद महिलाओं की प्रजनन सेहत के लिए सबसे सही मानी जाती है.

American Society of Reproductive Medicine के एक रिसर्च में पाया गया कि जो महिलाएं इतने घंटे सोती थीं उनमें गर्भधारण की संभावना उन महिलाओं से काफी ज्यादा थी जो 7 घंटे से कम या 9 घंटे से ज्यादा सोती थीं. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात 11 बजे तक जरूर सो जाएं.