होली पर क्यों बनाई जाती हैं ठंडाई? जानें इससे जुड़ा इतिहास
हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 4 मार्च को मनाया जा रहा है.
रंगों का यह त्योहार उमंग और उत्साह का प्रतीक होता है. इस दिन हर कोई एक-दूसरे के गाल पर अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं.
यह फेस्टिवल दो दिनों तक मनाया जाता है. पहले दिन होलिका दहन होता और उसके अगले दिन होली खेली जाती है.
इस दिन घरों में तरह-तरह के तीखे-मीठे पकवान बनाए जाते हैं. जिनमें गुजिया और ठंडाई सबसे प्रमुख होता है.
कुछ जगहों पर तो ठंडाई के बिना होली का मजा अधूरा लगता है, लेकिन आपने कभी सोचा है कि होली पर ठंडाई क्यों बनाई जाती है.
मान्यतानुसार ठंडाई का संबंध 1000 ईसा पूर्व से बताया जाता है, जब मुगल काल के राजाओं और नवाबों के सामने ठंडाई परोसी जाती थी.
आयुर्वेद के मुताबिक, यह पेय पदार्थ न केवल शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है, बल्कि पाचन में भी मदद करता है.
इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव माता पार्वती से ब्याह करने के बाद वैराग्य जीवन को त्यागकर गृहस्थ जीवन की ओर अग्रसर हुए थे.
ऐसे में इस जश्न की खुशी में भांग की ठंडाई का वितरण हुआ था. तभी से ठंडाई पीने का रिवाज है.