कॉकरोच जनता पार्टी को नहीं मिलेगा कॉकरोच चुनाव चिन्ह, जानिए वजह
इन दिनों सोशल मीडिया पर जो चीज सबसे ज्यादा वायरल हो रही, वो है Cockroach Janta Party.
Cockroach Janta Party का क्रेज युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रहा है. इस पार्टी ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग बटोर ली है.
ऐसे में हर कोई यही बात कह रहा कि अगर ये पार्टी चुनावी मैदान में उतरेगी तो राजनीति के गलियारों में हलचल मच जाएगी.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर ये पार्टी देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहेगी, तो इसे चुनाव आयोग के बेहद कड़े नियमों का सामना करना पड़ेगा.
इतना ही नहीं, इस पार्टी को अपना चुनाव चिन्ह यानी Cockroach भी नहीं मिलेगा. आइए जानते हैं वजह...
भारत में किसी भी नए दल को चुनाव लड़ने से पहले भारतीय चुनाव आयोग के पास खुद को पंजीकृत कराना जरूरी होता है.
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन की यह कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है.
इस अनिवार्य पंजीकरण के बिना कोई भी संगठन चुनाव आयोग से अपने लिए किसी भी तरह के अधिकार या चुनाव चिह्न का दावा नहीं कर सकता है.
भारत में चुनाव चिह्न बांटने का पूरा जिम्मा सिर्फ और सिर्फ चुनाव आयोग के पास होता है. देश में सिंबल मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बंटे होते हैं.
जिसमें पहला 'आरक्षित प्रतीक' है जो मान्यता प्राप्त बड़ी पार्टियों के पास सुरक्षित रहता है, जैसे कमल या झाड़ू.
दूसरी श्रेणी 'मुफ्त प्रतीक' यानी फ्री सिंबल्स की होती है, जो नई पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलते हैं. इस फ्री लिस्ट में सौ से अधिक रोजमर्रा की चीजों को शामिल किया गया है.
रजिस्टर्ड होने के बाद कोई भी दल अपनी पसंद के तीन नए प्रतीकों का सुझाव चुनाव आयोग के सामने रख सकता है.
हालांकि, वर्ष 1968 के चुनाव चिह्न आदेश के तहत एक बेहद स्पष्ट और कड़ा नियम लागू है कि कोई भी नया सिंबल किसी पक्षी या जीव-जंतु जैसा नहीं होना चाहिए.
ऐसे में कॉकरोच एक जीव है, इसलिए यह नियम इस पार्टी के मंसूबों पर पानी फेर सकता है. अब ये चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह तिलचट्टे को जीव की श्रेणी में रखकर इसका आवेदन खारिज करता है या नहीं.