आखिर 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है बजट? यहां जानिए इतिहास

1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2026-27 के लिए अंतरिम बजट पेश करने वाली हैं. 

इस बार फिर आम जनता को बजट से काफी उम्मीदें हैं. हर कोई लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहा है. 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले बजट पेश करने की तारीख 1 फरवरी नहीं, बल्कि 28 फरवरी थी.

ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्यों 1 फरवरी ही बजट पेश किया जाने लगा. इसके पीछे का क्या इतिहास है…

2017 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फरवरी के अंतिम कार्य दिवस पर बजट पेश करने की सदियों पुरानी परंपरा से हटाने की घोषणा की.

जो औपनिवेशिक काल से चली आ रही प्रथा है. यह 1860 के दशक से शुरू हुई एक परंपरा थी जब ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों ने इसे भारत में पेश किया था. 

पूर्व वित्त मंत्री जेटली ने बताया कि 1 फरवरी को बदलाव का उद्देश्य 92 साल पुरानी औपनिवेशिक युग की प्रथा से छुटकारा पाना था. 

इसके अतिरिक्त, फरवरी के अंत में बजट पेश करने से सरकार के पास 1 अप्रैल से प्रभावी होने वाली नई नीतियों और परिवर्तनों की तैयारी के लिए न्यूनतम समय बच गया. 

इसलिए, बजट प्रस्तुति की तारीख को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया.