नीला या काला पेन ही क्यों इस्तेमाल करते हैं स्टूडेंट्स, जानें वजह

स्कूल और कॉलेज में स्टूडेंट्स नीले या काले रंग के पेन का ही इस्तेमाल करते हैं. वहीं, टीचर्स हमेशा लाल रंग की पेन का यूज़ करते हैं.

लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर स्टूडेंट्स नीले या काले रंग के पेन का ही क्यों इस्तेमाल करते हैं. आइए जानते हैं.

दरअसल, इसके पीछे कोई आधिकारिक नियम नहीं है. दुनिया के कई देशों में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.

रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कुछ खास कारण माने जाते हैं. आमतौर पर सफेद कागज पर लिखते हैं. ऐसे में नीली और काली स्याही सबसे ज्यादा साफ दिखाई देती है.

ये दोनों गहरे रंग होते हैं और सफेद कागज के साथ अच्छा कंट्रास्ट बनाते हैं. इसी वजह से लिखे गए शब्द आसानी से पढ़े जा सकते हैं और लंबे समय तक साफ नजर आते हैं.

हल्के रंग की स्याही की तुलना में नीले और काले रंग में लिखे गए शब्द को समझना भी आसान होता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक नीली और काली स्याही जल्दी फीकी नहीं पड़ती और लंबे समय तक पढ़ने लायक रहती है. काली स्याही आमतौर पर लंबे समय तक अपना रंग बनाए रखती है और समय के साथ जल्दी फीकी नहीं पड़ती.

वहीं नीली स्याही में मौजूद विशेष रंग देने वाला तत्व होते हैं. जो इसे लंबे समय तक साफ बनाए रखने में मदद करते हैं. बताया जाता है कि काली स्याही ज्यादा कंट्रास्ट देती है, इसलिए कई जगहों पर हेडिंग्स और जरूरी बिंदु काले रंग से लिखे जाते हैं.

वहीं दूसरी ओर नीला रंग आंखों के लिए ज्यादा कमर्फटेबल लगता है, इसलिए लंबे आंसर या सामान्य लिखाई के लिए इसका यूज ज्यादा किया जाता है.