मंदिर से हमेशा उल्टे कदम ही बाहर क्यों निकलते हैं लोग? हैरान कर देगी वजह

जब भी हम मंदिर में पूजा करने जाते हैं, तो ये देखते हैं कि ज़्यादातर लोग भगवान का दर्शन करने के बाद उल्टे कदमों से गर्भगृह से बाहर आते हैं.

वो भगवान की तरफ़ पीठ करके बाहर नहीं निकलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है…

दरअसल, भगवान के सामने से सीधे पीठ मोड़कर चले जाना अनजाने में उनका अनादर माना जाता है. ऐसे में जब हम मंदिर के निकलते हैं, तो हमारा ध्यान और चेहरा ईश्वर की तरफ ही रहता है. यह हमारे आदर भाव को दिखाता है.

मंदिर का गर्भगृह ऊर्जा का एक बहुत बड़ा केंद्र होता है. जहां भगवान की मूर्ति होती है वहां सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा पाई जाती है. जब हम हाथ जोड़कर ईश्वर के सामने खड़े होते हैं तो वह ऊर्जा हमारे शरीर में प्रवेश करती है.

अगर हम दर्शन करते ही तुरंत पीछे मुड़ जाएंगे तो उस ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है. उल्टे कदमों से बाहर आने का मतलब है कि हम उस शांति और आशीर्वाद को अपने साथ समेटकर घर ले जा रहे हैं.

सीधे पीठ मोड़कर चले जाना इंसान के अहंकार को दर्शाता है. ऐसा लगता है जैसे काम खत्म हुआ और हम चलते बने. लेकिन जब हम धीरे-धीरे पीछे की तरफ कदम बढ़ाते हैं तो ये हमारी नम्रता को दिखाता है.

जैसे ही हम मंदिर से बाहर जाने के लिए मुड़ते हैं, हमारा ध्यान तुरंत भटक जाता है. लेकिन जब हम भगवान को देखते हुए पीछे हटते हैं तो हमारा ध्यान आखिरी समय तक मूर्ति पर टिका रहता है.

इससे मन में भटकाव नहीं आता है. मंदिर में मिली मानसिक शांति लंबे समय तक हमारे साथ बनी रहती है और हमारा दिन अच्छा बीतता है.