BCD और GST में कटौती के बाद निर्माताओं ने तीन कैंसर रोधी दवाओं की घटाई MRP: केंद्र

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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निर्माताओं ने तीन कैंसर रोधी दवाओं– ट्रैस्टुजुमैब डेरक्सटेकन, ओसिमर्टिनिब और डर्वालुमैब दवाओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) घटाना शुरू कर दिया है. सरकार द्वारा ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्देश जारी किया गया है. ये जानकारी संसद में साझा की गई. केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया, सरकार ने तीन दवाओं/फॉर्मूलेशन पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को शून्य करने के अलावा इन कैंसर रोधी दवाओं पर जीएसटी दरों को 12% से घटाकर 5% करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था.

अनुप्रिया पटेल ने कहा, नोटिफिकेशन के अनुपालन में निर्माताओं ने इन दवाओं पर एमआरपी घटा दी है और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के पास सूचना दाखिल की है. एक नोटिस जारी कर एनपीपीए ने कंपनियों को जीएसटी दरों में कमी और सीमा शुल्क से छूट के कारण इन दवाओं पर एमआरपी कम करने का निर्देश दिया था, ताकि ग्राहकों को कम करों और शुल्कों का लाभ दिया जा सके और कीमतों में बदलाव के बारे में जानकारी दी जा सके.

उदाहरण के लिए, एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड ने कई फॉर्मूलेशन पर प्रति शीशी एमआरपी कम कर दी है. रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, “जैसा कि कंपनी ने 19.11.2024 के पत्र के माध्यम से सूचित किया है, बीसीडी शून्य होने के कारण नीचे की ओर संशोधन तब लागू किया जाएगा जब बीसीडी राहत से लाभ कमाने वाले स्टॉक बाजार में वाणिज्यिक बिक्री के लिए जारी किए जाएंगे.” केंद्रीय बजट में, सरकार ने कैंसर से पीड़ित लोगों के वित्तीय बोझ को कम करने और पहुंच को आसान बनाने के लिए तीन कैंसर दवाओं पर सीमा शुल्क से छूट दी है.

स्तन कैंसर के लिए किया जाता है ट्रैस्टुजुमैब डेरक्सटेकन का इस्तेमाल

सरकार ने इन तीन कैंसर दवाओं पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% कर दिया है. ट्रैस्टुजुमैब डेरक्सटेकन का इस्तेमाल स्तन कैंसर के लिए किया जाता है, ओसिमर्टिनिब फेफड़ों के कैंसर के लिए है; और डुरवालुमैब फेफड़ों के कैंसर और पित्त पथ के कैंसर दोनों के लिए है. भारत में कैंसर के मामले काफी बढ़ रहे हैं. हाल ही में लैंसेट के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 2019 में लगभग 12 लाख नए कैंसर के मामले और 9.3 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो एशिया में बीमारी के बोझ में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है.

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