US: ट्रंप प्रशासन को झटका, अवैध प्रवासियों के तेजी से निर्वासन पर संघीय जज ने लगाई अस्थायी रोक

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US: अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को उस समय बड़ा झटका लगा, शुक्रवार को जब एक संघीय जज ने हिरासत में लिए गए अवैध प्रवासियों के तेजी से निर्वासन पर अस्थायी रोक लगा दी. मालूम हो कि ट्रंप प्रशासन संघीय कानूनी दायरा बढ़ाकर अवैध प्रवासियों को बिना जज के सामने पेश किए जल्द से जल्द देश से बाहर निकालना चाहता था.

ट्रप ने 2024 के चुनावी अभियान के दौरान किया था यह वादा

मालूम हो कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 के चुनावी अभियान के दौरान यह वादा किया था कि अगर वह दोबारा व्हाइट हाउस लौटते हैं, तो वह बड़े बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान चलाएंगे. उन्होंने कहा था कि वह अपने दूसरे कार्यकाल में सालाना दस लाख लोगों को निर्वासन करना चाहते हैं. हालांकि, वॉशिंगटन डीसी की यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जिया कॉब ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की तेजी से निर्वासित करने की नीति से लोगों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.

अपनी 48 पन्नों की राय में कॉब ने लिखा

अपनी 48 पन्नों की राय में कॉब ने लिखा कि  सरकार इस संक्षिप्त प्रक्रिया का बचाव करते हुए एक चौंकाने वाली दलील देती है, जो लोग देश में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं, उन्हें संविधान के पांचवें संशोधन के तहत कोई कानूनी प्रक्रिया का अधिकार नहीं है, बल्कि उन्हें कांग्रेस (संसद) जो भी कृपा दे, उसे ही स्वीकार करना होगा. अगर यह दलील सही मानी जाए, तो फिर न केवल गैर-नागरिक, बल्कि हर किसी के अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं.

ट्रंप के जनवरी में पद संभालने के बाद होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने अवैध प्रवासियों के तेजी से निर्वासन की घोषणा की थी. इस प्रक्रिया में उन अवैध प्रवासियों को जल्द देश से बाहर निकालना था, जो अमेरिका में दो साल से कम समय से हैं. अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संगठन और प्रवासी अधिकार समूहों ने इस प्रयास के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं.

पहले तेजी से निर्वासन की प्रक्रिया केवल उन्हीं प्रवासियों पर लागू होती थी, जिन्हें अमेरिका-मैक्सिको सीमा से 100 मील के दायरे में पकड़ा जाता था और जो अमेरिका में 14 दिन या उससे कम समय से रह रहे होते थे. बाद में ट्रंप प्रशासन ने इस प्रक्रिया का विस्तार किया.

जज कॉब ने न तो इस कानून की सांविधानिकता पर सवाल उठाया और न ही इसे सीमा पर लागू किए जाने को लेकर कोई आपत्ति जताई. कॉब पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा नियुक्त की गई थीं. उन्होंने लिखा, मुद्दा यह है कि जब इस कानून को देश के अंदर रह रहे बड़ी संख्या में लोगों पर लागू किया जाता है, जिन्हें पहले तेजी से निर्वासन का सामना नहीं करना पड़ा, तो सरकार को उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया प्रदान करनी होगी.

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