खामेनेई पर संकट! आंदोलनकारियों के समर्थन में उतरे रुबियो, पहलवी का सत्ता के खिलाफ खड़े होने का आह्वान?

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New Delhi: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरानी आंदोलनकारियों को खुले समर्थन का दावा किया है. अमेरिका खुलकर ईरानी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा दिख रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं और शनिवार को विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक छोटा सा बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किया. उन्होंने कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स ईरान के बहादुर लोगों का सपोर्ट करता है.

इजरायल और अमेरिका ने किया विरोध-प्रदर्शनों को बढ़ाने का काम

उनका बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि ठीक एक दिन पहले लेबनान दौरे के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों को बढ़ाने का काम इजरायल और अमेरिका ने किया है. उनकी इस टिप्पणी को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भ्रम का नाम दिया था. प्रवक्ता ने कहा कि यह बयान ईरानी सरकार के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों से ध्यान हटाने की एक भ्रमपूर्ण कोशिश दर्शाता है.

सरकारी कर्मचारियों से सत्ता के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान

दूसरी ओर क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने सरकारी कर्मचारियों से सत्ता के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान किया है. इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी का नाम काफी चर्चा में है. उन्होंने एक संदेश जारी कर लोगों को एकजुट होकर लड़ाई लड़ने को कहा था और शनिवार को फिर एक वीडियो बयान जारी किया है. उन्होंने फारसी में इस्लामिक रिपब्लिक शासन के खिलाफ दो और रातों के प्रदर्शनों और सरकारी कर्मचारियों से देश भर में हड़ताल में शामिल होने की अपील की है.

ईरानियों के सड़कों पर उतरने के बाद प्रदर्शनकारियों की हिम्मत की तारीफ

पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार की रात को ईरानियों के सड़कों पर उतरने के बाद प्रदर्शनकारियों की हिम्मत की तारीफ की और प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे बढ़ते विद्रोह को कंट्रोल करने की सरकार की काबिलियत को कमजोर करते रहें. यातायात और ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वालों से मुखातिब पहलवी ने शनिवार रात और रविवार को शाम 6 बजे इस्लामिक रिपब्लिक का विरोध करने के लिए फिर से सड़कों पर उतरने को कहा.

अब सिर्फ सड़कों पर उतरना नहीं है मकसद

रेजा पहलवी ने इस संदेश में तख्तापलट की बात की. उन्होंने कहा कि हमारा मकसद अब सिर्फ सड़कों पर उतरना नहीं है. मकसद शहर के सेंटर्स पर कब्जा करने और उन्हें अपने कब्जे में रखने की तैयारी करना है. उन्होंने आगे कहा कि वह अपने वतन लौटने की तैयारीश् भी र रहे हैं, एक ऐसे दिन जिसके बारे में उन्हें लगता है कि वह बहुत पास है. बता दें कि तेहरान के हालात बेहद नाजुक हैं. लोग सड़क पर हैं, हिंसा में कइयों की जान जा चुकी है. इंटरनेट सेवाएं लगभग 36 घंटे से ठप हैं. ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

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