Mars Mystery: मंगल ग्रह पर 3.5 अरब साल पहले आई थी विशाल बाढ़, ESA की तस्वीरों ने खोले राज

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Mars Mystery: अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से रहस्यों और रोमांच से भरी रही है. पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रहों पर होने वाली गतिविधियां वैज्ञानिकों को लगातार आकर्षित करती रही हैं. अब यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ESA) ने मंगल ग्रह से जुड़ा एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. एजेंसी ने हाल ही में कुछ नई तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें मंगल ग्रह के अरबों साल पुराने इतिहास की झलक देखने को मिली है.

3.5 अरब साल पहले मंगल पर आई थी विनाशकारी बाढ़

ESA के मुताबिक करीब 3.5 अरब साल पहले मंगल ग्रह की जमीन के नीचे छिपा हुआ पानी अचानक सतह पर फूट पड़ा था. इसके बाद वहां बेहद शक्तिशाली बाढ़ आई थी, जिसने मंगल की सतह पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बाढ़ इतनी भीषण थी कि इससे लगभग 10 किलोमीटर चौड़ी और करीब 500 मीटर गहरी विशाल घाटी बन गई. इसके अलावा इस घटना से ‘शलबताना वैलिस’ नाम का लगभग 1,300 किलोमीटर लंबा चैनल भी बना, जिसकी लंबाई लगभग इटली के बराबर बताई जा रही है.

नई तस्वीरों में दिखे मंगल के कई रहस्य

मार्स एक्सप्रेस स्पेसक्राफ्ट द्वारा ली गई नई तस्वीरों में मंगल ग्रह की सतह के कई ऐसे हिस्से दिखाई दिए हैं, जो उसके प्राचीन इतिहास की कहानी बताते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक पानी, लावा और समय ने मिलकर मंगल की सतह को वर्तमान स्वरूप दिया है. तस्वीरों में कई बड़े गड्ढे दिखाई दिए हैं जिन्हें ‘इम्पैक्ट क्रेटर्स’ कहा जाता है. इसके अलावा ज्वालामुखीय गतिविधियों के संकेत, लावा के ठंडा होने से बनी लकीरें और टूटे हुए चट्टानी क्षेत्र भी दिखाई दिए हैं.

क्या मंगल पर कभी महासागर मौजूद थे?

वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस क्षेत्र की तस्वीरें सामने आई हैं, उसके पास ‘क्राइसे प्लैनिटिया’ मौजूद है, जिसे मंगल ग्रह का सबसे निचला क्षेत्र माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यहां कभी विशाल महासागर मौजूद रहे होंगे. मंगल ग्रह पर लंबे समय से शोध कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि एक समय ऐसा भी था जब वहां नदियां, झीलें और शायद महासागर भी मौजूद थे.

MARSIS रडार कैसे करता है काम?

मार्स एक्सप्रेस मिशन साल 2003 से लगातार मंगल ग्रह की परिक्रमा कर रहा है. इस मिशन में नासा और इतालवी स्पेस एजेंसी भी शामिल हैं. इस मिशन का सबसे अहम उपकरण MARSIS रडार है, जो मंगल ग्रह की सतह के नीचे छिपे पानी, बर्फ और अन्य भूगर्भीय संरचनाओं का पता लगाने में मदद करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई खोज मंगल ग्रह के अतीत को समझने और भविष्य में वहां जीवन की संभावनाओं की जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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