लाहौर में लौटे पुराने हिंदू नाम: पाकिस्तान सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला 

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पाकिस्तान ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है जिसकी चर्चा चारों तरफ तेज हो गई है दअरसल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर शहर की कई ऐतिहासिक सड़कों और गलियों को उनके आजादी से पहले वाले नाम लौटाने की योजना को मंजूरी दे दी है. यह बड़ा फैसला मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लाहौर की विभाजन-पूर्व सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को फिर से जीवित करना है.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब की सीएम मरियम नवाज का मानना है कि यूरोपीय देशों की तरह लाहौर के इतिहास और इसकी मिली-जुली संस्कृति को संजोया जाना जरूरी है. आपको बता दें कि पाकिस्तान दुनिया के सामने खुद को एक सहिष्णु, धर्मनिरपेक्ष और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध देश के रूप में पेश करना चाहता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि हिंदू नामों की वापसी पर वहां कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ. इसका कारण यह है कि नवंबर 2025 में पाकिस्तान सरकार ने कट्टरपंथी संगठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान’ पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था. नवाज शरीफ के नेतृत्व में चलने वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य इतिहास को पुनर्परिभाषित करना है. ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में लाहौर की सांस्कृतिक गठन में क्या बदलाव आते हैं.

किन-किन जगहों के बदले जाएंगे नाम
पंजाब सरकार द्वारा मंजूर सूची में कई प्रसिद्ध इलाकों और चौकों के नाम शामिल हैं. इनमें-

रहमान गली को फिर से राम गली
सुन्नत नगर को संत नगर
मौलाना जफर अली खान चौक को लक्ष्मी चौक
मुस्तफाबाद को धर्मपुरा

नाम दिए जाने की योजना है, इन इलाकों के पुराने नाम हिंदू, सिख और ब्रिटिश दौर से जुड़े थे, जिन्हें 1947 के विभाजन के बाद बदला गया था. अब सरकार इन्हें दोबारा ऐतिहासिक पहचान देने की कोशिश कर रही है.

किन जगहों के नाम को पुराने नामों से जोड़ा जा रहा

लाहौर की ऐतिहासिक गलियों और सड़कों में क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, ब्रैंडरेथ रोड, राम गली, टेम्पबेल स्ट्रीट, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, कुम्हारपुरा, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और आउटफॉल रोड शामिल हैं. इन सभी को उनके पुराने नामों से जोड़ा जा रहा है.

मिंटो पार्क में नई पहल

नवाज शरीफ ने मिंटो पार्क (ग्रेटर इकबाल पार्क) में तीन क्रिकेट मैदान और एक पारंपरिक कुश्ती अखाड़ा फिर से तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा है.

क्रिकेट और कुश्ती की विरासत

मिंटो पार्क में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक जैसे कई खिलाड़ियों ने अभ्यास किया था. विभाजन से पहले भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी यहां ट्रेनिंग लेते थे. 1978 में जब वह भारतीय टीम के साथ लाहौर गए, तो उन्होंने क्रिसेंट क्रिकेट क्लब के खिलाड़ियों से मुलाकात की. वहीं कुश्ती के अखाड़े में गामा पहलवान, गूंगा पहलवान और इमाम बख्श जैसे दिग्गजों के मुकाबले हुआ करते थे. और इसकी एक खास बात और है कि यहां हिंदू समुदाय दशहरा का त्योहार भी मनाता था.

भविष्य में क्या हो सकता है ?

विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम पाकिस्तान में इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को लेकर बदलती सोच को दर्शाता है. लाहौर लंबे समय तक हिंदू, सिख, मुस्लिम और ब्रिटिश संस्कृति का संगम रहा है. ऐसे में पुराने नामों की वापसी को सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत को स्वीकार करने की कोशिश माना जा रहा है. अब यह देखना है कि यह नाम परिवर्तन लोग कैसे स्वीकार करते हैं और क्या इससे लाहौर की ऐतिहासिक पहचान में कोई स्थायी बदलाव आता है. अचानक किए गए ये बदलाव समाज में विभाजन भी पैदा कर सकते हैं, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इससे एक नई सोच विकसित होगी जो लाहौर की पहचान को और मजबूत बनाएगी.

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