AI ने मचाया नौकरी बाजार में हड़कंप! 18 महीने में 1.3 लाख कर्मचारियों की छंटनी, 7 करोड़ जॉब्स पर खतरा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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AI Layoffs in China: जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कंपनियां भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बता रही हैं, वही अब लाखों कर्मचारियों के करियर के लिए चिंता का कारण बनती दिखाई दे रही है. चीन के टेक सेक्टर से सामने आए आंकड़े इस डर को और गहरा कर रहे हैं. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, एआई को तेजी से अपनाने और कारोबार के पुनर्गठन के बीच देश की प्रमुख टेक कंपनियों ने पिछले 18 महीनों में 1.3 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है.

चिंता सिर्फ नौकरियां जाने की नहीं है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई कंपनियां घाटे से जूझने के कारण कर्मचारियों को बाहर नहीं कर रहीं, बल्कि मुनाफे के बावजूद अपने कारोबार को ज्यादा कुशल और एआई आधारित बनाने के लिए वर्कफोर्स घटा रही हैं. इसी के साथ इतने बड़े स्तर पर हो रही नौकरी कटौती के बीच चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए हैं.

इन पांच दिग्गज कंपनियों में बड़े स्तर पर गईं नौकरियां

श्रीलंका स्थित डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की दिग्गज टेक कंपनियों अलीबाबा, टेनसेंट, बाइटडांस, मीतुआन और बायडू में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा हुई है. नौकरी कटौती का असर अलग-अलग विभागों पर पड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्रा, कंटेंट और ई-कॉमर्स सपोर्ट से जुड़े कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या 30 से 50 प्रतिशत तक घटाई गई है. पिछले 18 महीनों में इन पांच प्रमुख इंटरनेट कंपनियों ने मिलकर 1.3 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को बाहर किया है.

अलीबाबा में कर्मचारियों की संख्या 34 प्रतिशत घटी

रिपोर्ट में अलीबाबा से जुड़ा आंकड़ा सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है. इसके मुताबिक, कंपनी के कर्मचारियों की संख्या करीब 1.94 लाख से घटकर 1.28 लाख रह गई. यानी वर्कफोर्स में लगभग 34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. वहीं, बायडू ने करीब 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी की है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेडी डॉट कॉम लगभग 12 हजार नौकरियां खत्म करने की योजना बना रही है.

मुनाफा बढ़ने के बावजूद क्यों निकाले जा रहे कर्मचारी?

इस बार की छंटनी को लेकर सबसे बड़ा सवाल कंपनियों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी कटौती इसलिए ज्यादा चिंता पैदा कर रही है क्योंकि इसे केवल घाटे या कारोबार बचाने की मजबूरी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कंपनियां अपना अस्तित्व बचाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करती थीं, लेकिन अब वे कारोबार को अधिक कुशल बनाने के लिए ऐसा कर रही हैं. कंपनियों की रणनीति तेजी से एआई आधारित उत्पादों और सेवाओं की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते कई पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत घटने का खतरा पैदा हो रहा है.

2030 तक 90 प्रतिशत AI उपयोग का लक्ष्य

रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग का ‘एआई प्लस एक्शन प्लान’ प्रमुख उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बड़े स्तर पर बढ़ाने पर केंद्रित है. इसके तहत वर्ष 2027 तक 70 प्रतिशत और 2030 तक 90 प्रतिशत एआई उपयोग का लक्ष्य रखा गया है. इसी बदलाव के बीच अलीबाबा के वुकोंग प्लेटफॉर्म जैसे एआई टूल्स की चर्चा भी की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे टूल्स ई-कॉमर्स, लाइव स्ट्रीमिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में पूरे विभाग के काम को ऑटोमेट करने और ‘वन-पर्सन कंपनी’ मॉडल को संभव बनाने का दावा करते हैं.

चीन में 7 करोड़ नौकरियों पर खतरे का दावा

एआई का बढ़ता इस्तेमाल भविष्य में कितने बड़े स्तर पर रोजगार को प्रभावित कर सकता है, इसे लेकर रिपोर्ट में बेहद गंभीर अनुमान सामने रखा गया है. विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया गया है कि चीन में करीब 7 करोड़ नौकरियां एआई के कारण जोखिम में हैं. यह संख्या देश के कुल कार्यबल का लगभग 9.6 प्रतिशत बताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव का सबसे ज्यादा खतरा युवा कर्मचारियों को हो सकता है.

क्या 35 साल की उम्र बन रही नौकरी के लिए खतरा?

रिपोर्ट में चीन के रोजगार बाजार से जुड़ी एक और चिंताजनक स्थिति का दावा किया गया है. इसके मुताबिक, देश में अनौपचारिक रूप से 35 वर्ष की उम्र की सीमा जैसी स्थिति बनती जा रही है. दावा है कि 35 वर्ष के आसपास पहुंच चुके कर्मचारियों को बड़े स्तर पर नौकरी से बाहर किया जा रहा है. यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इस उम्र तक कई कर्मचारियों पर परिवार, होम लोन और बच्चों से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारियां होती हैं.

26 वर्षीय पूर्व कर्मचारी की कहानी का भी जिक्र

रिपोर्ट में बाइटडांस के एक 26 वर्षीय पूर्व कर्मचारी का उल्लेख भी किया गया है. बताया गया है कि कंटेंट ऑपरेशंस में छह साल तक काम करने के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया. कर्मचारी के अनुसार, पहले बड़ी टेक कंपनी का नाम प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था, लेकिन काम की वास्तविकता में लगातार ओवरटाइम और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था. अब स्थिति यह है कि किसी बड़ी टेक कंपनी में काम करने का अनुभव भी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं रहा.

चीनी सरकार की भूमिका पर उठाए गए सवाल

रिपोर्ट में चीनी सरकार के रुख की भी आलोचना की गई है. आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों की सुरक्षा या नौकरी गंवाने वालों को नए कौशल का प्रशिक्षण देने के लिए ठोस नीतियां लागू करने के बजाय ऑटोमेशन और एआई को विकास के प्रतीक के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है. तेजी से बढ़ता एआई इस्तेमाल चीन की टेक इंडस्ट्री को अधिक कुशल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट में सामने आए छंटनी के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि इस तकनीकी परिवर्तन की कीमत बड़ी संख्या में कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवाकर चुकानी पड़ रही है.

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