China Rocket: चीन के स्पेस प्रोग्राम को सोमवार को बड़ा झटका देने वाला साबित हुआ. इस दिन दक्षिणी चीन के हैनान स्थित वनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से रात करीब 8 बजकर 2 मिनट पर लॉन्ग मार्च-7A रॉकेट को अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया था. इस रॉकेट के साथ ही कम्युनिकेशन सेटेलाइट ChinaSat-4B भी भेजी जा रही थी. रॉकेट को जैसे ही लॉन्च किया गया, लेकिन 85 मिनट बाद रॉकेट में गंभीर गड़बड़ी हुई और वह आसमान में ही आग के बड़े गोले में बदल गया.
हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि रॉकेट में खराबी आखिर किस वजह से हुई. अब तक तक इसके जो वीडियो सामने आए है, उनमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे थोड़ी दूर उड़कर रॉकेट आग की लपटों में घिर गया. इसके बाद आसमान में धुएं का बड़ा गुबार बना और रॉकेट के मलबे के नीचे गिरने के वीडियो भी सामने आए.
चीन के लिए बड़ा झटका
यह घटना ऐसे समय में हुई जब चीन अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेजी से अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. दरअसल, चीन आने वाले वर्षों में अमेरिका के बराबर या उससे आगे निकलने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. चंद्रमा पर इंसानों को भेजना भी उसके बड़े अभियानों में शामिल है. ऐसे में किसी महत्वपूर्ण रॉकेट की लॉन्चिंग का इस तरह नाकाम होना उसके लिए सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि पूरे अंतरिक्ष अभियान की गति पर असर डालने वाला है.
इस दौरान सबसे बड़ी चिंता यह है कि अंतरिक्ष मिशन बेहद महंगे और मुश्किल होते हैं. एक रॉकेट के साथ सिर्फ मशीन नहीं जाती, बल्कि उसके पीछे कई सालों की तैयारी, वैज्ञानिकों की मेहनत और भारी रकम लगी होती है. ऐसे में एक रॉकेट और सेटेलाइट के नुकसान से भविष्य के मिशनों की योजना पर भी दबाव बढ़ सकता है.
रॉकेट को रीयूज कर रहा है चीन
बता दें कि हाल ही चीन दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेटों की दिशा में भी आगे बढ़ा है. चीन ने जुलाई में पहली बार एक ऐसे रॉकेट को सफलतापूर्वक वापस धरती पर उतारा था, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. ये उसकी बड़ी कामयाबी थी और ऐसे रॉकेट भविष्य में लॉन्च की लागत घटाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन नई तकनीक के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं.
यही वजह है कि लगातार सफल परीक्षण और भरोसेमंद लॉन्च चीन के लिए बेहद जरूरी हैं. चीन 2030 से पहले अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारना चाहता है. अमेरिका भी आर्टेमिस मिशन के जरिए इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. ऐसे समय में रॉकेट की यह नाकामी चीन को अपनी तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा जांच करने के लिए मजबूर कर सकती है.

