Iranian rial exchange rate: ईरान की करेंसी 24 अगस्त को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अनौपचारिक करेंसी मार्केट में ट्रेडिंग शुरू होते ही रियाल की कीमत गिरकर 2.02 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर हो गई. वहीं, ईरान के सेंट्रल बैंक की आधिकारिक दर करीब 1.5 मिलियन रियाल प्रति डॉलर थी, लेकिन इस रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकतर ईरानी अनौपचारिक दर पर ही लेन-देन करते हैं.
ईरान की करेंसी में यह गिरावट उस समय में हुई जब ईरान को घुटनों पर लाने की चाहत से अमेरिका नए प्रतिबंधों की घोषणा करने की तैयारी कर रहा था. इन प्रतिबंधों की घोषणा के दिन यानी 24 अगस्त को अमेरिका ने ‘इकोनॉमिक D-डे’ नाम दिया है. दरअसल, अमेरिका का कहना है कि इनसे ईरान की उस अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा जो पहले से ही पुराने प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी से बुरी तरह प्रभावित है.
जंग ने और बिगाड़े हालात
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले से पहले ही रियाल करेंसी दबाव में थी. तब महंगाई दो अंकों में थी़ जबकि ग्रोथ नेगेटिव में था. लेकिन करीब छह महीने की जंग के कारण हालात और बिगड़े हैं और करेंसी नए निचले स्तर पर पहुंच रही है.
“अमेरिका आज ईरान पर लगाएगा सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिबंध”
बता दें कि ईरान की हिम्मत को तोड़ने की कोशिश में, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने वादा किया कि सोमवार को पहले से लागू प्रतिबंधों से भी अधिक कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की जाएगी. इनमें उन देशों पर प्रतिबंध भी शामिल होंगे जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखते हैं. दरअसल, बीते हफ्ते ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने घोषणा की थी कि वह ईरान के साथ सारा व्यापार रोक रहा है. घोषणा से एक दिन पहले ट्रंप ने UAE के नेता शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की थी.
दरअसल, UAE लंबे समय से ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों और आयात के सबसे बड़े सोर्स में से एक रहा है. इसके साथ ही ईरानी व्यवसायों के लिए एक प्रमुख री-एक्सपोर्ट और फाइनेंशियल हब भी रहा है. बेसेंट के बयानों के बाद, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नेता मोहसेन रेजाई ने X पर एक पोस्ट में कहा कि किसी भी देश का नए अमेरिकी आर्थिक उपायों का समर्थन करना “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा.

