South Korea Hormuz: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया पर दबाव बनाया था, जिसके बाद अब लग रहा है कि दक्षिण कोरिया झुकने को तैयार हो गया है. क्योकि जिस दक्षिण कोरिया ने पहले कहा था कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद ही वह सैन्य मदद पर विचार करेगा, वही अब होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नेवी उतारने की तैयारी कर रहा है.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस साल के अंत तक दक्षिण कोरिया होर्मुज में सैन्य संसाधन भेज सकता है. इसके लिए संसद की मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. फिलहाल, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
ट्रंप के दबाव के बाद बदला रुख?
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप कई बार दक्षिण कोरिया से नाराजगी जता चुके हैं. उनका कहना है कि सियोल ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ नहीं दिया. हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कम करना चाहिए. इसके कुछ ही समय बाद अमेरिकी सेना ने सैन्य अभ्यास खत्म कर दिया. इसके पीछे ट्रंप ने ईरान युद्ध में दक्षिण कोरिया की मदद न करना भी एक वजह बताया था. इन सभी दबावों के बाद दक्षिण कोरिया में होर्मुज को लेकर हलचल तेज है.
ऐसे में सियोल इस बात पर विचार कर रहा है कि वहां समुद्री रास्तों की सुरक्षा में किस तरह मदद की जाए. बता दें कि दक्षिण कोरिया के ऐसा करने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि ड़ोनाल्ड ट्रंप ने अचानक उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग की तारीफ शुरू कर दी है.
होर्मुज में क्या भेजेगा दक्षिण कोरिया?
रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोरिया P-8 निगरानी विमान भेजने पर विचार कर रहा है, जो समुद्र में पनडुब्बियों और दूसरे जहाजों पर नजर रखने के काम आता है. इसके साथ नौसेना की विशेष टीम से EOD दल भी भेजा जा सकता है, जो विस्फोटक और खतरनाक हथियारों से निपटने में मदद करता है. इसके अलावा एक रसद जहाज भी भेजे जाने की संभावना है, जो विमान और टीम के लिए जरूरी सामान और दूसरी सहायता उपलब्ध करा सकता है. यानी यदि तैनाती होती है तो दक्षिण कोरिया सिर्फ निगरानी के लिए विमान नहीं भेजेगा, बल्कि वह समुद्र में चल रहे दूसरे देशों के सैन्य अभियानों के साथ भी काम कर सकता है.

