अमेरिका: 200 साल में पहली बार टेनेसी में महिला को मौत की सजा, बॉयफ्रेंड संग मिल की थी युवती की हत्या

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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वाशिंगटन: दो सौ साल में पहली बार यूनाइटेड स्टेट्स के राज्य टेनेसी में किसी महिला को मौत की सजा दी जा रही है. क्रिस्टा पाइक वो महिला हैं, जिन्हें बुधवार 30 सितंबर को सजा दी जाएगी. क्रिस्टा पाइक ने 18 वर्ष की उम्र में जलन में आकर अपनी एक क्लासमेट की हत्या कर दी थी. इसी गुनाह के लिए उसे मौत की सजा दी गई है. क्रिस्टा पाइक को उसके गुनाह के लिए अब 50 साल की उम्र में बुधवार को मौत की सजी दी जानी है. यह टेनेसी में 200 साल में किसी महिला को दी जाने वाली पहली मौत की सजा होगी.

क्रिस्टा पाइक और उनके बॉयफ्रेंड को 1995 में नॉक्सविले जॉब कॉर्प्स में उनकी क्लासमेट, 19 साल की कोलीन स्लेमर की हत्या का दोषी ठहराया गया था. सरकारी वकीलों का कहना था कि पाइक को डर था कि स्लेमर उनकी रोमांटिक राइवल है, इसलिए क्रिस्टा ने उसे एक सुनसान जगह पर बुलाया और बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर स्लेमर को प्रताड़ित किया और उसकी हत्या कर दी.

इस मामले ने बहुत ध्यान खींचा, क्योंकि हत्या बहुत बेरहमी से की गई थी, इसमें शामिल लोगों की उम्र कम थी और पीड़िता के शरीर पर शैतानी प्रतीक उकेरा गया था.

क्रिस्टा पाइक ने कबूल किया अपना गुनाह

क्रिस्टा पाइक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया, लेकिन पाइक के वकील ने तर्क दिया कि उस उम्र में बिना इलाज वाली मानसिक बीमारी और बचपन में भयानक यौन शोषण और उपेक्षा झेलने वाले किशोर द्वारा किए गए अपराध के लिए मौत की सजा सही नहीं है.

पीड़िता स्लेमर की मां चाहती हैं कि जानलेवा इंजेक्शन (lethal injection) के जरिए सजा दी जाए. उनका कहना है कि उन्होंने पाइक की सजा पर अमल होते देखने के लिए दशकों तक इंतजार किया है. टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने सोमवार को घोषणा की कि वह दया याचिका मंजूर नहीं करेंगे. पाइक के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से सज पर रोक लगाने की अपील की है.

दया याचिका में पाइक के दर्दनाक अतीत का जिक्र किया गया है. पाइक के वकीलों ने कहा कि उनका बचपन बहुत ही दर्दनाक और शोषण भरा रहा था. असिस्टेंट फेडरल डिफेंडर स्टीफन फेरेल ने कहा कि पाइक का यौन शोषण तब से हो रहा था जब वह बहुत छोटी बच्ची थीं और 11 व 17 साल की उम्र में उसका बलात्कार हुआ था.

स्टीफन फेरेल ने कहा कि ट्रायल के सजा वाले चरण में पाइक के वकीलों ने जूरी के सामने उनके अतीत के बारे में जरूरी जानकारी पेश नहीं की और न ही इस बात पर जोर दिया कि उनकी उम्र पर भी विचार किया जाना चाहिए.

बाद में पाइक बाइपोलर डिसऑर्डर और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) की पहचान हुई. पाइक ने पुलिस को बताया कि शुरू में वह सिर्फ स्लेमर से लड़ना चाहती थीं, लेकिन गुस्से में किए गए हमले में उन्होंने उसकी हत्या कर दी.

अपनी दया याचिका में पाइक के वकीलों ने कहा कि उनकी बिना इलाज वाली मानसिक बीमारी और बैकग्राउंड की वजह से वह खुद को रोक नहीं पाईं. पाइक ने अपनी दया याचिका में शामिल एक बयान में कहा, ‘मैं 18 साल की मानसिक रूप से बीमार लड़की थी. मैंने जो किया था, उसकी गंभीरता को समझने में ही मुझे कई साल लग गए और भी ज्यादा समय यह स्वीकार करने में लगा कि मैंने कितने लोगों की जिंदगी पर असर डाला. मैंने किसी के बच्चे, बहन या दोस्त की जान ले ली. अब यह सोचकर ही मुझे घिन आती है कि मुझमें ऐसा अपराध करने की क्षमता थी.’

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