DPDP Act Children Data Rules: केंद्र सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 को लेकर नियम और भाषा स्पष्ट कर दिया हैं. इस संबंध में हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी किया है. इस रिवीजन का मुख्य उद्देश्य कानून की भाषा में मौजूद अस्पष्टता को दूर करने को साथ ही डेटा प्रोटेक्शन नियमों को पारदर्शी बनाना है. सरकार के इस कदम से बच्चों और युवाओं के डिजिटल डेटा की प्राइवेसी और सुरक्षा को और भी मजबूत कानूनी कवच मिल गया है.
दरअसल, नए आदेश के तहत सरकार ने दो अहम प्रावधान स्पष्ट किए हैं. पहलाः- बच्चों और कानूनी अभिभावक वाले दिव्यांग व्यक्तियों के पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग से जुड़ा है. इसके तहत माता-पिता या अभिभावक की सत्यापन योग्य सहमति अनिवार्य की गई है. दूसराः- Significant Data Fiduciary के लिए ऑडिट प्रक्रिया से जुड़ा है. अब इसे स्पष्ट रूप से ‘डेटा ऑडिट’ कहा गया है. इस स्पष्टता से टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स और डेटा प्रोसेस करने वाली संस्थाओं के लिए नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा.
बच्चों और दिव्यांगों के डेटा पर सख्त नियम
- किसी भी बच्चे या कानूनी अभिभावक के अधीन आने वाले दिव्यांग व्यक्ति का पर्सनल डेटा प्रोसेस करने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सत्यापन योग्य सहमति लेना अनिवार्य होगा.
- हालांकि इससे पहले भाषा में कुछ तकनीकी अस्पष्टता थी. लेकिन अब सरकार ने ‘डिजिटल वैयक्तिक डेटा संरक्षण (कठिनाइयों का निवारण) आदेश, 2026’ के जरिए इसे दूर कर दिया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील वर्गों के डेटा का दुरुपयोग न हो और हर स्तर पर पुख्ता सुरक्षा बनी रहे.
स्पष्ट किया गया ‘डेटा ऑडिट’ शब्द
बता दें कि इस नए आदेश के तहत Significant Data Fiduciary से जुड़े नियमों में भी बड़ा सुधार किया गया है. कानून की पुरानी भाषा में ‘ऑडिट’ शब्द के बार-बार इस्तेमाल से इसके दायरे को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही थी, जिसे अब बिल्कुल साफ कर दिया गया है. अनुपालन दायित्वों के तहत होने वाले ऑडिट को स्पष्ट रूप से ‘डेटा ऑडिट’ या ‘डेटा संरक्षण ऑडिट’ कहा जाएगा. इस बदलाव से Regulatory Authorities और कंपनियों के बीच नियमों के पालन को लेकर किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होगी.

