Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बच्चों के लिए गंभीर संकट बना हुआ है. साढ़े सात महीने बाद भी इस संक्रामक बीमारी और खसरे जैसे लक्षणों से बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है. रविवार सुबह 8 बजे तक के पिछले 24 घंटों में सात बच्चों की मौत दर्ज की गई. इसके साथ ही इस साल खसरे से जुड़ी पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,162 हो गई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के बीच टीकों की खरीद और नियमित टीकाकरण में आई बाधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
24 घंटे में 7 बच्चों की मौत, हजारों नए संदिग्ध मामले
बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हुई सातों मौतों को संदिग्ध खसरे की श्रेणी में रखा गया है. इस अवधि में खसरे से किसी भी मौत की प्रयोगशाला या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई. आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक संदिग्ध खसरे से 1,058 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि संक्रमण से 104 मौतों की पुष्टि हुई है. इस तरह पुष्ट और संदिग्ध मौतों का कुल आंकड़ा 1,162 तक पहुंच गया है. इसी अवधि में खसरे के 1,180 नए संदिग्ध मामले सामने आए. इसके बाद देश में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,05,028 हो गई. वहीं, 93 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिससे प्रयोगशाला में पुष्ट संक्रमणों की संख्या 22,421 तक पहुंच गई.
1.82 लाख से ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती
DGHS के अनुसार, 15 मार्च से अब तक खसरे के संदिग्ध लक्षणों वाले कुल 1,82,047 मरीजों को देशभर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. इनमें से 1,74,469 मरीज ठीक हो चुके हैं. लगातार सामने आ रहे मामलों और बच्चों की मौतों ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. संदिग्ध मामलों और पुष्ट संक्रमणों के आंकड़ों में अंतर को ध्यान में रखना भी जरूरी है, क्योंकि सभी संदिग्ध मामलों की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से नहीं हुई है.
टीकों की खरीद प्रक्रिया में देरी पर उठे सवाल
बांग्लादेश में खसरे के बढ़ते प्रकोप के बीच टीकों की खरीद प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हो रही है. द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अंतरिम सरकार की ओर से सितंबर 2025 में यूनिसेफ के माध्यम से टीके खरीदने की प्रक्रिया रोककर खुली निविदा प्रक्रिया अपनाने के फैसले की आलोचना की गई थी.
रिपोर्ट में साइंस डॉट ओआरजी के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा गया कि नीतिगत अनिश्चितता और खरीद प्रक्रिया में व्यवधान के कारण नियमित टीकाकरण प्रभावित हुआ. इससे बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका बढ़ी. इससे पहले बांग्लादेश खसरा और रूबेला के टीकों की आपूर्ति के लिए लंबे समय से यूनिसेफ पर निर्भर था. इसके लिए मुख्य रूप से गावी और बांग्लादेश सरकार की ओर से वित्तपोषण किया जाता था.
रोहिंग्या शिविरों से 58 जिलों तक फैली बीमारी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी में म्यांमार सीमा के पास स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में बीमारी के मामले सामने आने शुरू हुए. इसके बाद खसरा देश के 64 में से 58 जिलों तक फैल गया. इस प्रकोप के कारण 21,000 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. संक्रमण के व्यापक प्रसार ने नियमित टीकाकरण की उपलब्धता और बच्चों को समय पर टीके लगाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में टीका लगवाने के पात्र बच्चों में से केवल 59 प्रतिशत को खसरे का टीका मिला था. हालांकि, बाद में ये आंकड़े आधिकारिक वेबसाइटों से हटा दिए गए. टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और आपूर्ति की कमी को नियमित टीकाकरण प्रभावित होने के संभावित कारणों में शामिल किया गया है.
विटामिन A अभियान पर भी चिंता
बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को लेकर भी चिंता जताई गई है. संक्रामक रोग नियंत्रण एवं अनुसंधान संस्थान (IEDCR) के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक एएसएम आलमगीर के अनुसार, 2024 से विटामिन A वितरण अभियान के प्रभावी ढंग से नहीं चलने के कारण बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ा हो सकता है. खसरे के प्रकोप के बीच टीकाकरण की उपलब्धता, बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और विटामिन A जैसे पोषण कार्यक्रमों की स्थिति महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं.
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