Warehouse Leasing: भारत के वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र ने वर्ष 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है. औद्योगिक मांग में मजबूती और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में तेजी के चलते इस सेक्टर में रिकॉर्ड लीजिंग दर्ज की गई है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में देशभर में 1.058 करोड़ वर्गफुट वेयरहाउस स्पेस की लीजिंग हुई. वहीं, 2026 के पहले नौ महीनों में कुल अवशोषण बढ़कर 3.26 करोड़ वर्गफुट पहुंच गया, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है.
तीसरी तिमाही में लीजिंग 15 प्रतिशत बढ़ी
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी वेस्टियन की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत के वेयरहाउसिंग क्षेत्र में मांग मजबूत बनी हुई है. जुलाई-सितंबर तिमाही में लीजिंग गतिविधियों में तिमाही आधार पर 0.2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. रिपोर्ट बताती है कि कंपनियों की ओर से वेयरहाउसिंग सुविधाओं की बढ़ती मांग इस क्षेत्र को लगातार मजबूती दे रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों की बढ़ती भागीदारी से बाजार का विस्तार हो रहा है.
तीसरी तिमाही में 332 मिलियन डॉलर का निवेश
वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र ने 2026 की तीसरी तिमाही में 33.2 करोड़ डॉलर यानी 332 मिलियन डॉलर का संस्थागत निवेश आकर्षित किया. यह कुल तिमाही संस्थागत निवेश का 17 प्रतिशत रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में किसी एक तिमाही के दौरान इस क्षेत्र में निवेश की यह सबसे अधिक हिस्सेदारी है. वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा कि भारत का वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र अब पारंपरिक मांग के स्रोतों से आगे बढ़ रहा है. थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि मजबूत मांग, बुनियादी ढांचे में सुधार और सरकार की नीतिगत सहायता इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को और बेहतर बना रही है.
3PL क्षेत्र सबसे बड़ा लीजिंग सेगमेंट
सेक्टर के हिसाब से थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) तीसरी तिमाही में सबसे बड़ा लीजिंग सेगमेंट बना रहा. हालांकि, कुल लीजिंग में इसकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 41 प्रतिशत से घटकर 29 प्रतिशत रह गई. वहीं, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत रही. ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर ने 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. रिपोर्ट के अनुसार, देश में खपत बढ़ने, विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की जरूरत बढ़ने से निवेशक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं. विशेष रूप से आधुनिक और तकनीक आधारित वेयरहाउसिंग परिसंपत्तियों में निवेश का रुझान मजबूत बना हुआ है.
चेन्नई, मुंबई और पुणे में सबसे ज्यादा लीजिंग
शहरों के प्रदर्शन की बात करें तो चेन्नई ने तीसरी तिमाही में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. यहां 28.9 लाख वर्गफुट वेयरहाउस स्पेस की लीजिंग दर्ज की गई. यह पिछली तिमाही के मुकाबले 320 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 156 प्रतिशत अधिक है. मुंबई 27 लाख वर्गफुट लीजिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहा. हालांकि, यहां तिमाही आधार पर 46 प्रतिशत और सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, पुणे 22 लाख वर्गफुट वेयरहाउस स्पेस की लीजिंग के साथ तीसरे स्थान पर रहा. इस शहर में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 245 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई.
आधुनिक वेयरहाउसिंग सुविधाओं की बढ़ेगी मांग
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से मांग बढ़ने के कारण आधुनिक और तकनीक-सक्षम वेयरहाउसिंग सुविधाओं का इस्तेमाल और बढ़ेगा. इसका फायदा देश के स्थापित लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ-साथ नए उभरते वेयरहाउसिंग केंद्रों को भी मिलने की संभावना है. बढ़ती खपत, औद्योगिक विस्तार, बेहतर बुनियादी ढांचे और निवेशकों की दिलचस्पी से भारत का वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र आने वाले समय में भी विकास की मजबूत संभावनाएं रखता है.

