घने अंधेरे में कैसे उड़ते हैं चमगादड़? वैज्ञानिकों ने खोला रहस्य

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bat Navigation: घने जंगल और चारों ओर अंधेरा होने के बावजूद चमगादड़ तेज रफ्तार से उड़ान भरता है, लेकिन कैसे. इन्‍हीं सवालों को अब वैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है. चमगादड़ों के पिच-ब्लैक अंधेरे में इतनी सटीकता से उड़ान भरने के पीछे के कारणों का पता लगा पाना सिर्फ प्रकृति की अद्भुत क्षमता को उजागर करती है, बल्कि भविष्य की ड्रोन और रोबोटिक तकनीक को भी नई दिशा दे सकती है.

दरअसल, ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में सामने आया है कि चमगादड़ सिर्फ इको-लोकेशन (Echolocation) यानी ध्वनि तरंगों से वस्तुओं की दूरी मापने पर ही निर्भर नहीं करते, जैसा कि अब तक माना जाता था.

इकोलोकेशन से आगे की सोच

अबतक वैज्ञानिक मानते थें कि चमगादड़ हर पेड़, पत्ती और टहनी को सोनार (Sonar) की मदद से ‘मैप’ करते हैं. साफ शब्दों में कहे तो जैसे- किसी घने जंगल में यह प्रक्रिया वैसी ही होती, जैसे एक साथ हजारों मैसेज पढ़ने की कोशिश करना. नई रिसर्च के मुताबिक, चमगादड़ ‘अकूस्टिक फ्लो वेलोसिटी’ (Acoustic Flow Velocity) का इस्तेमाल करते हैं.

इसका मतलब है कि ध्वनि तरंगें वातावरण में कितनी तेजी से और किस तरह से बह रही हैं, जिसे माध्यम की घनता (Density) और दबाव (Compressibility) तय करती है. सरल शब्दों में, चमगादड़ हर पत्ती की गिनती नहीं करते, बल्कि ध्वनि के “टेक्सचर” या प्रवाह को महसूस करते हैं, जो उनके आसपास के वातावरण की गति और बनावट का संकेत देता है.

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