13 October 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Aaj Ka Panchang 13 October 2026: आज 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है. इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, आज आश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगी. वहीं, रात 8 बजकर 24 मिनट तक प्रीति योग रहेगा और विशाखा नक्षत्र देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग, पूजा के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिनभर के महत्वपूर्ण समय….

13 अक्टूबर 2026 का पंचांग

  • दिन: मंगलवार
  • मास: आश्विन
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • तिथि: तृतीया, रात 11:28 बजे तक
  • योग: प्रीति योग, रात 8:24 बजे तक
  • नक्षत्र: विशाखा, देर रात 1:43 बजे तक
  • नवरात्रि: तीसरा दिन
  • आराध्य देवी: मां चंद्रघंटा

13 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 से 5:43 बजे तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 5:19 से 6:32 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:48 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 से 3:09 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:17 से 6:42 बजे तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 6:17 से 7:31 बजे तक
  • अमृत काल: शाम 4:14 से 5:57 बजे तक

आज अलग-अलग शहरों में राहुकाल का समय

  • दिल्ली: दोपहर 3:00 से शाम 4:27 बजे तक
  • मुंबई: दोपहर 3:21 से शाम 4:49 बजे तक
  • चंडीगढ़: दोपहर 3:01 से शाम 4:28 बजे तक
  • लखनऊ: दोपहर 2:46 से शाम 4:13 बजे तक
  • भोपाल: दोपहर 3:01 से शाम 4:29 बजे तक
  • कोलकाता: दोपहर 2:18 से 3:46 बजे तक
  • अहमदाबाद: दोपहर 3:21 से शाम 4:48 बजे तक
  • चेन्नई: दोपहर 2:53 से शाम 4:22 बजे तक

13 अक्टूबर को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: सुबह 6:20 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:53 बजे

नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है. देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को साहस, शक्ति और दुष्ट शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है.

उनका स्वरूप शस्त्रों से सुसज्जित और भक्तों को निर्भयता प्रदान करने वाला माना जाता है. देवी के हाथों में कमल, धनुष, जपमाला, बाण, त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार जैसे आयुध बताए गए हैं. उनके एक हाथ में अभय मुद्रा और दूसरे में वरद मुद्रा होती है, जो भक्तों को सुरक्षा और आशीर्वाद देने का प्रतीक मानी जाती हैं.

मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी खीर का भोग लगाया जा सकता है. भक्त देवी की पूजा करके सुख-शांति और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं. पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी परंपरा के अनुसार विधि का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है.

मां चंद्रघंटा की आराधना को साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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