Temple Vastu Tips: सनातन धर्म में देवी-देवताओं की मूर्ति या चित्र के रूप में पूजा करने की काफी पुरानी परंपरा है. ज्यादातर लोग अपने घरों में मंदिर बनवाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करते हैं और रोजाना पुजा पाठ करते हैं. इससे घर में ना केवल सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है बल्कि कई तरह के दोष भी दूर होते हैं.
हालांकि, धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में देवी-देवताओं की कुछ मूर्तियां या तस्वीरें घर में में रखने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, कई तरह के दोष उत्पन्न होते हैं, परिवार में लड़ाई-झगड़ा शुरू हो जाता है. साथ ही परिवार के सदस्यों की तरक्की भी रूक जाती है. इसका विवरण वास्तु शास्त्र के साथ-साथ गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और नारद संहिता जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. ऐसे में कोई मूर्ति टूट जाती है या किसी देवता का चित्र फट जाता है, तो उसे तुरंत किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए. इसके अलावा, कुछ प्रकार की मूर्तियों को घर के मंदिर में स्थापित करने से वर्जित माना गया है.
महाकाली की भयंकर मूर्ति
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, घर के मंदिर में देवी काली के भयंकर रूप की मूर्ति नहीं रखना चाहिए. माता काली के इस रूप को अत्यंत शक्तिशाली और तांत्रिक प्रथाओं से जुड़ा माना जाता है. ऐसी मूर्तियां घर के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं. वास्तु और शास्त्रों के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए देवी के केवल सौम्य और शांत रूप को ही स्थापित करना चाहिए.
काल भैरव की मूर्ति
इसके अलावा, काल भैरव को भगवान शिव का भयंकर रूप माना जाता है, जिनकी विशेष मंत्रों और अनुष्ठानों के साथ पूजा की जाती है. उनकी मूर्ति को घर में उचित पूजा के बिना रखने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं. इसी तरह भगवान शिव का नटराज रूप, जो तांडव मुद्रा में चित्रित है, भी अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह भयंकर ऊर्जा का प्रतीक है.
शनि देव की मूर्ति
वहीं, शनि देव एक न्यायप्रिय व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी दृष्टि क्रूर मानी जाती है. इसलिए शनि देव की मूर्ति को घर के मंदिर में नहीं रखना चाहिए. माना जाता है कि परिवार के सदस्यों पर उनकी सीधी दृष्टि जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं को जन्म दे सकती है.
राधा और कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियां
पुराणों के मुताबिक, राधा और कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियां या तस्वीर घर के मंदिर में नहीं रखनी चाहिए. उनके प्रेम और एकता का प्रतीकवाद तभी प्रभावी होता है, जब वे एक साथ हों. उनकी मूर्तियों को अलग-अलग रखने से घर में तनाव, कलह और असहमति बढ़ सकती है. इसका उल्लेख नारद संहिता और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है.

