Vastu Shastra Horseshoe: घर के मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि है सुरक्षा कवच, जानें इसके फायदे

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Vastu Shastra Horseshoe: घर के बाहर लगी लोहे की वह मुड़ी हुई नाल अक्सर हमारी नजरों में आती है, जिसे हम आमतौर पर सिर्फ एक टोटका या पुरानी परंपरा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि सदियों पुरानी यह परंपरा आज के डिजिटल दौर में भी क्यों उतनी ही प्रभावी मानी जाती है?असल में मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाना महज दिखावे की चीज नहीं है, बल्कि इसे घर की सुरक्षा के लिए एक तरह के ‘ऊर्जा फ़िल्टर’ माना जाता है, जो नकारात्मक प्रभावों को भीतर आने से रोकता है.

यदि आप भी अपने घर या दुकान के प्रवेश द्वार पर इसे लगाने की योजना बना रहे हैं, तो इससे जुड़े विज्ञान, वास्तु शास्त्र और इसे लगाने के सही तरीके को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है.

लोहा एक सुरक्षा कवच

हमारे बुजुर्गों और शास्त्रों की मानें तो लोहे में नकारात्मकता को सोखने की गजब की क्षमता होती है. लोहा जब आग में तपता है और फिर ठोक-पीटकर घोड़े के खुरों में लगता है, तो उसमें एक विशेष प्रकार की घर्षण ऊर्जा पैदा होती है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, यह धातु बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा को घर की दहलीज पर ही रोकने की क्षमता रखती है. इसे लगाने का अर्थ है कि आप अपने घर के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं, जिसे किसी भी नकारात्मक शक्ति के लिए पार करना आसान नहीं होता.

‘U’ आकार का असली मतलब

घोड़े की नाल को गौर से देखें तो इसका आकार बढ़ते हुए चंद्रमा जैसा दिखता है. फेंगशुई और भारतीय वास्तु, दोनों में ही इसके आकार को लेकर गहरा तर्क है. जब हम नाल को ‘U’ की तरह सीधा लगाते हैं (यानी खुला हिस्सा ऊपर की ओर), तो यह एक बर्तन या कटोरे की तरह काम करता है. लोक मान्यताओं के अनुसार, माना जाता है कि ब्रह्मांड से मिलने वाली सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा को यह अपने भीतर संचित कर लेता है. वहीं, यदि इसे उल्टी दिशा में लगाया जाए, तो यह विश्वास है कि संचित भाग्य नीचे की ओर बह जाता है.

कैसे और कब लगाएं घोड़े की नाल ?

अक्सर लोग बाजार से नई घोड़े की नाल खरीदकर उसे लगा देते हैं, लेकिन मान्यता है कि असली प्रभाव उस नाल का होता है जो घोड़े के खुर से अपने आप निकल गई हो या जो पहले से उपयोग में रही हो. ऐसी नाल में जमीन से घर्षण और पशु की ऊर्जा का प्राकृतिक मेल माना जाता है.

शनिवार का महत्व: चूंकि लोहे का सीधा संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है, इसलिए घोड़े की नाल को शनिवार के दिन सुबह या शाम के समय लगाना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से न केवल घर का वास्तु संतुलित होता है, बल्कि कुंडली से जुड़े शनि दोषों में भी राहत मिलने की मान्यता है.

सही स्थान का चुनाव: घोड़े की नाल को हमेशा घर के मुख्य द्वार के ठीक बीच में लगाना चाहिए. यदि प्रवेश द्वार उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में हो, तो इसके सकारात्मक प्रभाव और अधिक बढ़ जाते हैं.

क्या अंधविश्वास है यह ?

आजकल की पीढ़ी इसे अंधविश्वास कह सकती है, लेकिन गौर करें तो यह ‘विश्वास’ और ‘ऊर्जा के संतुलन’ का खेल है. जब हम किसी शुभ प्रतीक को अपने सामने देखते हैं, तो हमारे मन में सुरक्षा का भाव पैदा होता है. यही सकारात्मक सोच हमारे कार्यों में प्रगति लाती है और घर के वातावरण को सुख-शांति व बरकत से भर देती है.

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