आस्था के दरबार में अनंत अंबानी ने खोल दिया खजाना, राजराजेश्वरम और गुरुवायुर मंदिर को दिया करोड़ों का दान

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Anant Ambani Temple Donation: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने केरल के दो प्रसिद्ध मंदिरों राजराजेश्वरम मंदिर और गुरुवायुर मंदिर को कुल ₹6 करोड़ का दान देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने राजराजेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए ₹12 करोड़ देने का भी ऐलान किया है. अनंत अंबानी ने 2 अप्रैल को तलिपरंबा स्थित राजराजेश्वरम मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने पारंपरिक तरीके से पोनुमकुडम, पट्टम और अन्य भेंट चढ़ाई और मंदिर के नवीनीकरण कार्य के लिए ₹3 करोड़ का चेक सौंपा.

ऐतिहासिक ईस्ट गोपुरम का होगा पुनर्निर्माण

उन्होंने कहा कि मंदिर के ऐतिहासिक ईस्ट गोपुरम का भी पुनर्निर्माण कराया जाएगा. यह हिस्सा लंबे समय से जर्जर हालत में था. इसे मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण धरोहरों में गिना जाता है. इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.

 

मंदिर प्रशासन ने अनंत अंबानी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. इस दौरान देवस्वम बोर्ड के कई अधिकारी मौजूद रहे.

गुरुवायुर मंदिर में दिया 3 करोड़ रुपये का दान

इसके बाद अनंत अंबानी गुरुवायुर मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान गुरुवायुरप्पन के दर्शन किए और मंदिर ट्रस्ट को ₹3 करोड़ का दान दिया.

खास बात यह रही कि उन्होंने गुरुवायुर मंदिर से जुड़े हाथियों के बेहतर रख-रखाव के लिए भी मदद देने की घोषणा की. इसके तहत हाथियों के लिए अस्पताल, बिना जंजीर के रहने की व्यवस्था और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सके.

 

देवस्वम चेयरमैन ने किया स्वागत

गुरुवायुर मंदिर में उनका स्वागत देवस्वम चेयरमैन ए. वी. गोपीनाथ और अन्य अधिकारियों ने किया और उन्हें पारंपरिक सम्मान तथा प्रसाद भेंट किया गया. इस अवसर पर देवस्वम और जीवधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.

 

इस मौके पर अनंत अंबानी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपराएं केवल पूजा के स्थल नहीं हैं, बल्कि जीवंत संस्थान हैं जो आस्था, समाज, करुणा और प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को पोषित करते हैं. इन पवित्र धरोहरों को संरक्षित और सशक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. इन पहलों और वंतारा के माध्यम से हम विनम्रता के साथ सेवा करना चाहते हैं, जहां श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाया जा सके और परंपराओं का हिस्सा रहे पशुओं की देखभाल पूरी गरिमा, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हो.

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