कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से जीवनरक्षक कैंसर दवाओं को जीएसटी से छूट देना और तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माने गए हैं. यह निष्कर्ष अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ऑन्कोलॉजिस्ट्स द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में सामने आया है. अध्ययन के मुताबिक जीएसटी परिषद ने पिछले वर्ष सितंबर में आयोजित अपनी 56वीं बैठक में 33 जीवनरक्षक दवाओं, जिनमें कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं, को पूरी तरह जीएसटी से मुक्त करने की सिफारिश की थी.
कैंसर और दुर्लभ रोगों की दवाओं को बड़ी राहत
इन फैसलों के तहत 12 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत किए गए कई कैंसर रोधी ड्रग्स और दुर्लभ बीमारियों व कैंसर की तीन अहम दवाएं भी शामिल हैं, जिन पर पहले 5 प्रतिशत जीएसटी लागू था. अध्ययन में कहा गया है कि इन कदमों से स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तुलना में अधिक किफायती और सुलभ हुई हैं, साथ ही मरीजों पर पड़ने वाला जेब से खर्च भी कम हुआ है. इसके अलावा इस सप्ताह की शुरुआत में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटाने की घोषणा की थी, जिससे इलाज की लागत में और राहत मिलने की उम्मीद है.
एम्स विशेषज्ञों की राय
एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. अभिषेक शंकर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत में हालिया जीएसटी सुधार कैंसर उपचार को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि 33 जीवनरक्षक कैंसर और दुर्लभ रोगों की दवाओं को जीएसटी से मुक्त करने और चिकित्सा उपकरणों पर टैक्स घटाने से सरकार ने सीधे तौर पर मरीजों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ कम किया है. अध्ययन में यह भी बताया गया कि जीएसटी परिषद ने तंबाकू उत्पादों पर टैक्स स्लैब बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है, जो देश में किसी भी वस्तु वर्ग पर सबसे अधिक है.
1 फरवरी से लागू फैसलों के संभावित लाभ
1 फरवरी से लागू हुए इन फैसलों के लाभों को लेकर अध्ययन में कहा गया है कि इससे जीवन-वर्षों में वृद्धि, इलाज की लागत में बचत, समय से पहले होने वाली मौतों में कमी, स्वास्थ्य पर विनाशकारी खर्च से बचाव और गरीबी में गिरावट जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं. तंबाकू को वैश्विक स्तर पर कैंसर का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण माना जाता है. विश्व कैंसर दिवस पर जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसकी अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू सभी नए कैंसर मामलों के लगभग 15 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है. यह आंकड़ा तंबाकू नियंत्रण नीतियों की अहमियत को रेखांकित करता है.
रोकथाम और समान कैंसर देखभाल पर जोर
डॉ. शंकर ने कहा कि तंबाकू उत्पादों पर अधिक कर लगाना रोकथाम को मजबूती देता है, उपभोग को हतोत्साहित करता है और ऐसा राजस्व उत्पन्न करता है, जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दोबारा निवेश किया जा सकता है. अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसे आर्थिक और संरचनात्मक नीतिगत बदलाव समान सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और रोग भार वाले अन्य देशों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकते हैं.उन्होंने कहा कि हालांकि मरीजों तक लाभ समय पर पहुंचना बेहद जरूरी है, लेकिन ये सुधार एक संतुलित नीति दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो इलाज को समर्थन देता है, स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देता है और समान कैंसर देखभाल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है.
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