Crude Oil Price Today: कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल, होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव से बाजार में हलचल

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Crude Oil Price Today: वैश्विक बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, तेल सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर पर संदेह ने बाजार की दिशा बदल दी है. खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी असमंजस ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है ताजा स्थिति

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज कच्चे तेल के दामों में मजबूत तेजी दर्ज की गई है. ब्रेंट क्रूड वायदा 3.31% बढ़कर 97.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.2% की छलांग लगाकर 98.38 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया. यह उछाल ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी, जिससे साफ है कि बाजार फिलहाल अस्थिर बना हुआ है.

एक दिन पहले क्यों आई थी बड़ी गिरावट

बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था. उस समय बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर से तनाव कम होगा और तेल सप्लाई सामान्य हो जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है.

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है. इसी रास्ते से इराक, सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों का कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचता है. अगर इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ता है और कीमतों में तेजी आना तय हो जाता है.

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं. लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है. वहीं कुवैत, बहरीन और यूएई में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश की है.

शिपिंग कंपनियों की बढ़ी चिंता

तेल सप्लाई पर खतरे के बीच शिपिंग कंपनियों ने भी सतर्क रुख अपनाया है. उनका कहना है कि जब तक सीजफायर की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जातीं, तब तक वे इस मार्ग से जहाज भेजने में हिचकिचाएंगी. हालांकि ईरान ने सुरक्षित रास्तों के नक्शे जारी किए हैं, लेकिन जोखिम को देखते हुए कंपनियां अभी इंतजार कर रही हैं.

तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने सीजफायर के बाद पड़ोसी देशों में कुछ ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें सऊदी अरब की एक पाइपलाइन भी शामिल बताई जा रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर भी अब खतरे के दायरे में है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी जहाज, विमान और सैन्य बल ईरान के आसपास तैनात रहेंगे. उनके इस बयान से साफ है कि अमेरिका स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.

शेयर बाजार पर पड़ा असर

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है. सेंसेक्स 0.72% या 550 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ 77,000 के करीब ट्रेड करता नजर आया, जबकि निफ्टी50 140 अंकों से ज्यादा यानी 0.50% से अधिक गिरकर 23,800 के स्तर पर पहुंच गया.

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

वैश्विक दबाव के चलते एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली है. निक्केई, कोस्पी और हैंग सेंग जैसे प्रमुख सूचकांक करीब 1% तक गिर गए, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है.

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