आयकर विभाग ने सोमवार को जानकारी दी कि एक अप्रैल से 11 जनवरी की अवधि में देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 8.8% बढ़कर 18.37 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 16.88 लाख करोड़ रुपये था. आयकर विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 8.63 लाख करोड़ रुपये रहा है. वहीं, शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह 9.29 लाख करोड़ रुपए रहा है.
सरकार ने जारी किए ₹3.11 लाख करोड़ के रिफंड
सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स संग्रह 44,866.52 करोड़ रुपए रहा है. इसके साथ सरकार ने अन्य टैक्स के रूप में 321.23 रुपए एकत्रित किए हैं. आयकर विभाग ने कहा कि समीक्षा अवधि में 3.11 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है, इसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 16.92% की गिरावट दर्ज की गई है. इसमें से सरकार ने 1.83 लाख करोड़ रुपये का रिफंड कॉरपोरेट्स को जारी किया, जबकि व्यक्तिगत करदाताओं को 1.28 लाख करोड़ रुपये लौटाए गए.
भारत का सकल कर संग्रह बढ़कर ₹21.49 लाख करोड़
FY25 की समान अवधि में कुल रिफंड 3.75 लाख करोड़ रुपये था. यदि रिफंड को जोड़ लिया जाए तो एक अप्रैल से 11 जनवरी के बीच सकल कर संग्रह सालाना आधार पर 4.14% बढ़कर 21.49 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसमें सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 10.46 लाख करोड़ रुपये और सकल व्यक्तिगत कर संग्रह 10.58 लाख करोड़ रुपये रहा है. भारत में कर संग्रह की मजबूती का प्रमुख कारण देश की अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार से बढ़त है.
FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था रहेगी मजबूत
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में FY26 के लिए रियल जीडीपी वृद्धि 7.6% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान 7.4% से अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार, FY26 के लिए बाजार का औसत अनुमान 7.5% है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान 7.3% है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी खर्च और अनुकूल मौद्रिक नीति के समर्थन, लोगों की बढ़ती खरीद क्षमता और रोजगार की बेहतर स्थिति के चलते उपभोग में इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक रिकवरी को और मजबूती मिलेगी.
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